देहरादून के परेड ग्राउंड में महिला जन आक्रोश रैली का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर अपनी एकजुटता और शक्ति का प्रदर्शन किया. रैली में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हुए और उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार द्वारा पारित महिला शक्ति वंदन अधिनियम को ऐतिहासिक कदम बताया.

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रैली में हजारों महिलाओं की मौजूदगी ने पूरे आयोजन को उत्साह और ऊर्जा से भर दिया. विभिन्न जिलों से आई महिलाओं ने सरकार के समर्थन में नारे लगाए और महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद की. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिला शक्ति वंदन अधिनियम, जिसके तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है, के समर्थन में जनजागरण करना था.

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सीएम ने विपक्ष और कांग्रेस पर साधा निशाना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का रवैया महिलाओं के मुद्दे पर हमेशा से विरोधाभासी रहा है. एक ओर कांग्रेस संसद में इस महत्वपूर्ण विधेयक का समर्थन नहीं करती, वहीं दूसरी ओर प्रदेश में महिलाओं के आरक्षण की मांग उठाती है. उन्होंने इसे कांग्रेस का 'दोहरा चरित्र' करार दिया.

महिलाओं ने व्यक्त किया कांग्रेस के खिलाफ आक्रोश

रैली में मौजूद महिलाओं ने भी कांग्रेस के इस रुख के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और जो दल वास्तव में महिलाओं के हित में काम कर रहा है, उसका समर्थन होना चाहिए. महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल दिखावे के लिए महिलाओं की बात करती है, जबकि जमीनी स्तर पर उनकी नीतियां स्पष्ट नहीं हैं.

महिला वक्ताओं द्वारा सरकार के प्रयास की सराहना

कार्यक्रम के दौरान कई महिला वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए और महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार के प्रयासों की सराहना की. उन्होंने कहा कि महिला शक्ति वंदन अधिनियम देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा.

रैली के माध्यम से महिलाओं ने एक मजबूत संदेश दिया कि वे अब अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हैं और किसी भी तरह के भेदभाव या विरोधाभासी राजनीति को स्वीकार नहीं करेंगी. साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महिला हितों के खिलाफ जाने वाली नीतियों का वे विरोध करेंगी.

इस रैली ने न केवल महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को मजबूती से उठाया, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी एक स्पष्ट संदेश दिया कि महिलाओं की भागीदारी और अधिकारों को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

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