उत्तराखंड के देहरादून में आईएसबीटी क्षेत्र की आजाद कॉलोनी से तीन महीने पहले रहस्यमय हालात में लापता हुए छात्र मोहम्मद शारिक का कंकाल किमाड़ी के घने जंगल से बरामद हुआ है. कंकाल पर मिले कपड़ों से परिजनों ने उसकी शिनाख्त शारिक के रूप में की है. 

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लापता होने के 93 दिन बाद मिली इस जानकारी ने मामले को नया मोड़ दे दिया है. पुलिस अब इसे हत्या के एंगल से भी देख रही है. उधर हत्या की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया है.

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क्या है पूरा मामला ?

22 साल का शारिक मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के शेरकोट का रहने वाला था. शारिक देहरादून में ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजी में बीएससी तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा था और आजाद कॉलोनी में किराए के कमरे में रहता था. 17 जुलाई 2026 की रात करीब 10 बजे वह स्कूटी लेकर घर से निकला, कमरे में मौजूद एक व्यक्ति से उसने कहा था कि आधे घंटे में लौट आएगा जिसके बाद वह लापता हो गया. 

शारिक के लापता होने के अगले दिन 18 जुलाई को परिजन मोहम्मद तारिक ने पटेल नगर कोतवाली में शिकायत दी. पुलिस की तफ्तीश में जब कोई सफलता हासिल नहीं हुई तो मामले को अपहरण की धाराओं में दर्ज कर दिया गया.

जंगल में मिला कंकाल-हत्या की आशंका 

तीन महीने बाद किमाड़ी के जंगल में जब कंकाल मिला तो परिजन मौके पर पहुंचे और कपड़ों के आधार पर उसकी पहचान की. इसके बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शारिक की मौत कैसे हुई ? पुलिस की मामले को हत्या के एंगल से भी देख रही है. 

परिजनों का आरोप , दोस्तों ने की हत्या 

परिजनों ने शारिक के साथ रहने वाले दो युवकों पर हत्या का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि लापता होने के बाद से ही वे बेटे को ढूंढ रहे थे. वहीं उन्हें शक है कि शारिक के दोस्तों ने ही उसकी हत्या की है. कंकाल को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और शारिक की मौत के कारणों की जांच की जा रही है.

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