Dehradun News: स्कूटी आगे-VIP काफिला पीछे, ये कैसी तेल बचत? मंत्री की सवारी पर उठे सवाल, Video
Dehradun News: पेट्रोल-डीजल बचाने का संदेश देने के लिए देहरादून की सड़कों पर स्कूटी से निकले मंत्री जी विवादों में घिर गए हैं. मंत्री जी तो स्कूटी पर थे, लेकिन उनके पीछे पूरा VIP काफिला दौड़ रहा था.

सड़कों पर उस वक्त एक अनोखा और हैरान करने वाला दृश्य देखने को मिला, जब मंत्री जी पेट्रोल-डीजल बचाने का संदेश देने के लिए स्कूटी पर सवार होकर निकले. पहली नजर में यह तस्वीर बेहद सादगी भरी लगी, मानो मंत्री जी ने तेल बचत की अपील को गंभीरता से लेते हुए खुद एक बड़ी मिसाल पेश की हो. लेकिन, जैसे-जैसे इस पूरे घटनाक्रम की परतें खुलीं, यह 'सादगी' से ज्यादा 'इवेंट मैनेजमेंट' और दिखावे की राजनीति का हिस्सा नजर आने लगा.
वायरल हो रहे वीडियो में साफ दिख रहा है कि मंत्री जी स्कूटी पर आगे-आगे चल रहे हैं, जबकि उनके ठीक पीछे उनका पूरा वीआईपी (VIP) काफिला उसी रफ्तार से दौड़ रहा है. कई गाड़ियां, सुरक्षा वाहन और पूरा लाव-लश्कर पीछे-पीछे चल रहा था. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब मंत्री जी स्कूटी पर ही सफर कर रहे थे, तो पीछे इतनी गाड़ियों का काफिला क्यों? क्या यह वास्तव में ईंधन बचत है या सिर्फ कैमरे के लिए बनाई गई एक शानदार तस्वीर?
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'ड्राइवर की गलती' का तर्क जनता को नहीं पच रहा
बवाल मचने के बाद इस पूरे मामले में सफाई दी गई कि काफिला मंत्री जी के निर्देश पर नहीं, बल्कि 'ड्राइवर की गलती' से पीछे चल पड़ा था. हालांकि, यह तर्क लोगों के गले नहीं उतर रहा है. आम जनता सवाल पूछ रही है कि:
- क्या कोई ड्राइवर बिना निर्देश के इतना बड़ा फैसला खुद ले सकता है?
- क्या पूरा सुरक्षा काफिला अपनी मर्जी से मंत्री जी के पीछे चल सकता है?
- या फिर यह सिर्फ जिम्मेदारी से बचने का एक सुविधाजनक बहाना है?
बिना इंश्योरेंस की उधार की स्कूटी पर 'संदेश'
मामला सिर्फ वीआईपी काफिले तक ही सीमित नहीं रहा. इस 'स्कूटी सवारी' पर एक और बड़ा खुलासा हुआ है जिसने पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध बना दिया है. जानकारी के मुताबिक जिस स्कूटी पर मंत्री जी सवार थे, उसका इंश्योरेंस पिछले मार्च में ही खत्म हो चुका है. यानी जिस वाहन से 'संदेश' दिया जा रहा था, वह खुद नियमों का उल्लंघन कर रहा था. यह स्कूटी मंत्री जी की खुद की भी नहीं थी. एक उधार की सवारी पर पूरा अभियान खड़ा कर दिया गया.
सोशल मीडिया पर उड़ी खिल्ली
सोशल मीडिया पर इस पूरे मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. लोग जमकर तंज कस रहे हैं. यूज़र्स का कहना है कि यह "इवेंट मैनेजमेंट पॉलिटिक्स" का नया उदाहरण है, जहां असल मुद्दों से ज्यादा ध्यान सिर्फ तस्वीर और संदेश पर दिया जाता है.
विशेषज्ञों का भी मानना है कि अगर सरकार वास्तव में ईंधन बचत को लेकर गंभीर है, तो उसे नीतिगत स्तर पर ठोस कदम उठाने होंगे. सिर्फ एक दिन की प्रतीकात्मक स्कूटी सवारी से कोई बड़ा बदलाव नहीं आता. इसके लिए वीआईपी कल्चर (VIP Culture) पर लगाम लगाना और अनावश्यक काफिलों को कम करना सबसे ज्यादा जरूरी है. अब देखना दिलचस्प होगा कि इस दिखावे की राजनीति पर सरकार आगे क्या जवाब देती है.
























