उत्तराखंड के देहरादून में बीते शनिवार (21 फरवरी) को शिक्षा निदेशालय मे घुसकर प्राथमिक शिक्षा निदेशक अजय नोडियाल के साथ मारपीट और निदेशक के कार्यालय में  तोडफोड के मामले में रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ और उनके समर्थकों पर निदेशक की शिकायत के आधार पर  F.I.R दर्ज की गई थी. जिसमें पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. जबकि शिक्षक और कमर्चारी संगठन इस मामले में विधायक की भी गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे.

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इससे पहले कर्मचारियों की मांग पर कोई और एक्शन होता, उससे पहलेचारों आरोपियों को अपर सिविल जज ममता पंत ने जमानत दे दी. जिसके बाद कर्मचारियों का गुस्सा और बढ़ गया है. कर्मचारी संगठनों न दो दिन काली पट्टी बांधकर कार्य बहिष्कार का ऐलान किया था.

कमर्चारी संगठनों की आंदोलन की चेतावनी

आरोपियों की बेल के बाद शिक्षा विभाग के समस्त अधिकारी आक्रोशित हैं और संघ ने बड़े आंदोलन की चेतावनों दी है. अब यह पूरा प्रकरण किड ओर जाएगा यह देखने वाली बात होगी. क्यूंकि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के दखल के बाद भी विधायक ने सार्वजनिक रूप से लिखित या मौखिक माफी नहीं मांगी है. खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया था.

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क्या था पूरा मामला ?

दरअसल विधायक समर्थकों के साथ एक स्कूल में नाम बदलने की शिकायत लेकर शिक्षा निदेशक के कार्यालय में पहुंचे थे. यहां किसी बात पर बहस के बाद उनकी मारपीट हो गयी, जिसमें शिक्षा निदेशक घायल हो गए. यही नहीं विधायक समर्थकों द्वारा कार्यालय में भी तोड़फोड़ की गयी. जिसके बाद प्रदेश भर के शिक्षकों और शिक्षक कर्मचारी संगठनों ने नाराजगी जताई व मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है.

विपक्षी कांग्रेस और अन्य दलों ने भो बीजेपी विधायक पर गुंडागर्दी का आरोप लगाया है और कहा कि सरकारी अधिकारी अब  बीजेपी विधायकों द्वारा ही सुरक्षित नहीं है.