देहरादून: शिक्षा का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले देहरादून में कोचिंग संस्थानों की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है. अग्निशमन विभाग द्वारा चलाए जा रहे विशेष फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान में सामने आया है कि शहर के कई कोचिंग संस्थान बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं हैं. विभाग ने 28 दिनों तक चले इस अभियान में कुल 315 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया, जिसमें सबसे अधिक खामियां कोचिंग संस्थानों में पाई गईं.

Continues below advertisement

अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, ऑडिट किए गए 315 प्रतिष्ठानों में से करीब 135 ऐसे पाए गए, जहां फायर सेफ्टी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था. इनमें बड़ी संख्या कोचिंग सेंटरों की है. इन सभी संस्थानों को 15 दिन का नोटिस जारी कर आवश्यक व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए गए हैं. विभाग ने साफ कहा है कि तय समयसीमा के भीतर सुधार न करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

दरअसल, देहरादून को लंबे समय से शिक्षा का हब माना जाता है. यहां देशभर से छात्र उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं. शहर में नामी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के साथ-साथ सैकड़ों कोचिंग संस्थान भी संचालित हो रहे हैं. लेकिन इन संस्थानों में से कई ऐसे हैं, जो सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे छात्रों की जान जोखिम में पड़ सकती है.

Continues below advertisement

ऑडिट में सामने आया कि 55 कोचिंग संस्थानों में फायर सेफ्टी उपकरण या तो पर्याप्त नहीं थे या उनकी समय-समय पर सर्विसिंग नहीं कराई गई थी. इसके अलावा कई संस्थानों में आपातकालीन निकास मार्ग (इमरजेंसी एग्जिट) अवरुद्ध पाए गए, जो किसी भी आपात स्थिति में गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं. कुछ जगहों पर फायर अलार्म सिस्टम, इमरजेंसी संकेतक और अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं भी अधूरी या अनुपस्थित मिलीं.

अग्निशमन विभाग ने जानकारी दी कि इस अभियान के तहत 60 कोचिंग सेंटर, 122 होटल, 48 रेस्टोरेंट, 16 होमस्टे और अन्य प्रतिष्ठानों का भी ऑडिट किया गया. हालांकि सबसे ज्यादा लापरवाही कोचिंग संस्थानों में ही देखने को मिली, जो चिंता का विषय है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में छात्र प्रतिदिन अध्ययन करते हैं.

मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) अभिनव त्यागी ने बताया कि विभाग लगातार शहर के विभिन्न प्रतिष्ठानों का फायर सेफ्टी ऑडिट कर रहा है, क्योंकि आग की घटनाएं कहीं भी और कभी भी हो सकती हैं. उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों में कमियां पाई गई हैं, उन्हें नोटिस देकर 15 दिन का समय दिया गया है. यदि इस अवधि में सुधार नहीं किया गया, तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

उन्होंने यह भी बताया कि कई संस्थानों के पास तीन साल की वैध फायर एनओसी (No Objection Certificate) तो है, लेकिन उन्होंने फायर उपकरणों का नियमित मेंटेनेंस नहीं कराया है. ऐसे में केवल एनओसी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुरक्षा उपकरणों का सही तरीके से कार्य करना भी जरूरी है.

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शिक्षा के नाम पर चल रहे इन संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा को पर्याप्त प्राथमिकता दी जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन को नियमित निरीक्षण के साथ-साथ सख्त नियमों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके.

देहरादून जैसे शिक्षा केंद्र में इस तरह की लापरवाही न केवल चिंताजनक है, बल्कि छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है. अब देखना यह होगा कि नोटिस मिलने के बाद संबंधित संस्थान कितनी तेजी से अपनी व्यवस्थाएं दुरुस्त करते हैं और प्रशासन इस पर कितनी सख्ती दिखाता है.