उत्तराखंड में श्रम कानूनों के खिलाफ ट्रेड यूनियनों में आक्रोश दिखना शुरू हो गया है. केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर गुरुवार (12 फरवरी) को पूरे देश में हड़ताल होगी. उत्तराखंड में भी संयुक्त ट्रेड यूनियन संघर्ष समिति ने इसमें शामिल होने का ऐलान किया है. सीटू, इंटक और एटक जैसे बड़े संगठनों के अलावा आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कर्मचारी, भोजनमाता, ऑटो चालक, बस ड्राइवर-कंडक्टर, निर्माण मजदूर, चाय बागान कर्मी, स्कूल कर्मचारी, बैंक कर्मी, परिवहन निगम के कर्मचारी और बीमा फेडरेशन समेत दर्जनों संगठन इस आंदोलन में शामिल होंगे.

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नेताओं ने खोला मोर्चा

यूनियनों के नेताओं की तरफ से श्रम कानूनों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है. प्रेस से बातचीत में इंटक के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट, सीटू के प्रांतीय महामंत्री राजेंद्र सिंह नेगी, एटक के प्रांतीय महामंत्री अशोक शर्मा, सीटू के प्रांतीय सचिव लेखराज और बस्ती बचाओ आंदोलन के संयोजक अनंत आकाश ने मिलकर हड़ताल के कारण और मांगों को सामने रखा है.

श्रम संहिताओं पर गहरा गुस्सा

यूनियन नेताओं ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा. उनका आरोप है कि 2020 में कोरोना संकट के बीच, जब देश हालात से जूझ रहा था, विपक्षी सांसदों को निलंबित करके 44 पुराने श्रम कानूनों को समेटकर चार नई श्रम संहिताएं बना दी गईं. अब 21 नवंबर 2025 से इन्हें लागू करने की घोषणा हुई है.

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नेताओं का कहना है कि ये कानून पूंजीपतियों के हित में हैं. इनसे मजदूरों का शोषण बढ़ेगा, उनके अधिकार खत्म होंगे और गुलामी जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी. इसीलिए पूरे देश में इसका विरोध हो रहा है. 

बस्तियों के निवासी भी साथ

हड़ताल के दौरान एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट और एनजीटी के नाम पर जिन बस्तियों को उजाड़ा जा रहा है, उसके खिलाफ भी आवाज उठाई जाएगी ,बस्ती निवासियों ने साफ कर दिया कि वे भी 12 फरवरी को सचिवालय कूच में बढ़चढ़कर हिस्सा लेंगे और अपनी जमीन पर मालिकाना हक की मांग करेंगे. संघर्ष समिति ने जानकारी दी कि गुरुवार (12 फरवरी) को गांधी पार्क से विशाल रैली निकालकर सचिवालय तक मोर्चा खोल जाएगा. जहां डीएम के जरिए राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा.