देहरादून में एक मां के हाथों बेटे की हत्या हुई. यह मामला जब सामने आया तो पूरे शहर में सन्नाटा छा गया था. गैस एजेंसी संचालक अर्जुन शर्मा की हत्या और उसमें उनकी मां बीना शर्मा की गिरफ्तारी ने रिश्तों के उस अंधेरे पहलू को उजागर किया जिसे लोग मानने को तैयार नहीं थे. लेकिन अब इस हत्याकांड में एक और परत खुलती दिख रही है और इस बार जांच की सुईं परिवार के एक और करीबी चेहरे पर टिक गई है.

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दायरे में आई महिला अर्जुन के बेहद करीबी लोगों में से थी एक

पुलिस सूत्रों के मुताबिक जांच के दायरे में आई यह महिला अर्जुन के बेहद करीबी लोगों में से एक थी. संपत्ति विवाद हो या कोई और मामला वो हर जगह अर्जुन के साथ खड़ी रही. लेकिन हत्या से कुछ ही दिन पहले दोनों के बीच तीखी अनबन हुई थी.

जांच में यह भी सामने आया कि पूछताछ के दौरान उसने कुछ सवालों का जवाब देने से किनारा किया. बस यहीं से शक की सुई उसकी तरफ घूम गई. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अर्जुन की हत्या से उसे क्या फायदा होने वाला था और क्या वो इस षड्यंत्र की किसी कड़ी से जुड़ी है? पुलिस हत्या से ठीक पहले के उसके कॉल रिकॉर्ड और मुलाकातों को बारीकी से खंगाल रही है.

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वसंत विहार थाने में दर्ज FIR ने निभाई बदली जांच की दिशा

जांच की दिशा बदलने में एक अहम भूमिका वसंत विहार थाने में दर्ज उस FIR ने निभाई है, जो हत्या से कुछ ही दिन पहले अर्जुन और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज हुई थी. इसमें धोखाधड़ी का आरोप था. पुलिस का मानना है कि इस FIR के बाद ही अर्जुन और उसके अपनों के बीच रिश्तों में तेज बदलाव आया और शायद इसी बदलाव ने हत्या की जमीन तैयार की.

गौरतलब है कि तिब्बती मार्केट के पास भाड़े के हत्यारों ने अर्जुन को गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी. मामले में उसकी मां बीना शर्मा मुख्य आरोपी हैं और फिलहाल सुद्धोवाला जेल में बंद हैं. करोड़ों के संपत्ति विवाद और पारिवारिक रंजिश को इस हत्याकांड की जड़ माना जा रहा है.

अर्जुन की हत्या के बाद से ठप पड़ी अमरदीप गैस एजेंसी

हत्याकांड का असर सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं रहा, इसकी आंच अब 28 हजार उपभोक्ताओं तक पहुंच गई है. अमरदीप गैस एजेंसी 11 फरवरी को अर्जुन की हत्या के बाद से व्यावहारिक रूप से ठप पड़ी है. दिक्कत यह है कि एजेंसी के संचालन के लिए जरूरी चेक पर हस्ताक्षर करने वाली बीना शर्मा जेल में हैं और जेल प्रशासन ने नियमों का हवाला देकर उन्हें दस्तावेजों पर साइन करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है. ऊपर से भारत पेट्रोलियम (BPCL) ने साफ चेतावनी दे दी है कि अगर बकाया भुगतान समय पर नहीं हुआ तो गैस की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी.

मामला अब CJM कोर्ट पहुंच गया है. बचाव पक्ष के अधिवक्ता अमित पुंडीर ने अदालत में अर्जी दाखिल कर दलील दी है कि जेल मैनुअल के तहत विशेष परिस्थितियों में किसी बंदी को जरूरी व्यापारिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर की अनुमति दी जा सकती है. खासकर जब बात सार्वजनिक सेवा से जुड़ी हो. आज शनिवार को इस पर सुनवाई होने की उम्मीद है.