पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं और सांसदों पर हो रहे हमलों को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कड़ा रुख अपनाया है. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने इन घटनाओं की तीखी निंदा की और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए. प्रमोद तिवारी ने कहा कि मौजूदा हालात को देखकर लगता है कि वहां अब लोकतंत्र नहीं, बल्कि अधिनायकवाद और तानाशाही आ गई है.
जब सांसद सुरक्षित नहीं, तो आम कार्यकर्ता कैसे बचेगा?
सांसद प्रमोद तिवारी ने हाल ही में टीएमसी नेताओं पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि जब देश के जनप्रतिनिधि ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है.
- कल्याण बनर्जी पर हमले का जिक्र: उन्होंने कहा, "कल ही सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और बेहद वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी पर हमला हुआ."
- तीसरे सांसद के दफ्तर पर हमला: प्रमोद तिवारी ने आगे बताया कि आज सुबह (रात की घटना) एक और तीसरे सांसद के कार्यालय पर हमला होने की खबर सामने आई है.
- सुरक्षा पर बड़ा सवाल: उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि सांसद भारत की संसद का सदस्य होता है. जब वह खुद असुरक्षित महसूस करेगा, तो अंदाजा लगाइए कि बंगाल में एक आम राजनीतिक कार्यकर्ता की क्या हालत होगी?
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लोकतंत्र की जगह अधिनायकवाद का खतरा
कांग्रेस सांसद ने इन हमलों को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए सीधे तौर पर इसे तानाशाही करार दिया. उन्होंने कहा कि विपक्ष या किसी भी राजनीतिक दल के नेताओं पर इस तरह के सिलसिलेवार हमले बेहद चिंताजनक हैं. यह पूरी तरह से कानून-व्यवस्था की नाकामी को दर्शाता है और ऐसी स्थिति में निष्पक्ष राजनीतिक माहौल की कल्पना करना नामुमकिन है.
प्रमोद तिवारी के इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. विपक्ष लगातार इन हमलों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है.
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