कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने संभल पुलिस फायरिंग मामले में तत्कालीन एसओ अनुज चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने वाले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर के ट्रांसफर कर दिए जाने को रूटीन प्रक्रिया के बजाए राजनीतिक उद्देश्य से किया गया तबादला कहा है. उन्होंने पिछले दिनों सीएम योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था की तारीफ करने वाले सीजेआई सूर्यकांत से भी इस मामले पर संज्ञान लेने की अपील की है. 

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शाहनवाज आलम ने अपने बयान में कहा कि इस मामले में अब कटघरे में खुद न्यायपालिका आ गई है. अब उसे ही साबित करना है कि उसकी स्वतंत्रता बची है या उसने सरकार के आगे सरेंडर कर दिया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि अपनी गरिमा को बचाने की जिम्मेदारी न्यायपालिका निभाने में सफल होगी और संभल सीजेएम के आदेश पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चहेते पुलिस अधिकारी अनुज चौधरी पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजने में कोई दबाव बाधा नहीं बनेगी. 

उन्होंने कहा कि सरकार के मुस्लिम विरोधी नैरेटिव को बढ़ाने वाले पुलिस अधिकारियों पर कानून सम्मत आदेश देने पर जजों का तबादला करने के पीछे अन्य जजों को डराने की मंशा है. ताकि बाकी जज भी सरकार के खिलाफ फैसले देने से डरें. 

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शाहनवाज आलम ने कहा कि इससे पहले भी देश ने देखा है कि दिल्ली दंगों में बीजेपी नेताओं पर एफआईआर दर्ज न करने और सही दिशा में जांच न करने पर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश देने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के जज एस मुरलीधर का भी रातों रात ट्रांसफर कर दिया गया था. इसी तरह राजस्थान के एक जज दिनेश कुमार गुप्ता का भी अदानी की एक कंपनी पर 50 लाख का जुर्माना लगाने के तुरंत बाद ही ट्रांसफर कर दिया गया. 

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