सीएम योगी ने बेसिक शिक्षा निदेशक ने सहायक बेसिक शिक्षा निदेशकों और बीएसए को सख्त आदेश जारी किए है. अब निदेशालय स्तर पर आयोजित प्रत्येक ऑनलाइन समीक्षा बैठक में मंडल स्तर से सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) तथा जनपद स्तर से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की अनिवार्य सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी. 

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समान्य तौर पर अनुपस्थिति या अनधिकृत प्रतिनिधित्व की गुंजाइश नहीं होगी. इस संबंध में शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी ने सभी सहायक शिक्षा निदेशकों (बेसिक) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं.

मुख्यमंत्री योगी के निर्देशों में कहा गया है कि समय-समय पर आयोजित महत्वपूर्ण ऑनलाइन समीक्षा बैठकों में कई जनपदों से अपेक्षित स्तर की सहभागिता नहीं हो रही थी. सीएम ने कहा कि कई मामलों में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी स्वयं बैठक में शामिल नहीं होते थे और न ही किसी अधिकृत वरिष्ठ अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित होती थी. 

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सीएम ने कहा कि इसे प्रशासनिक जवाबदेही के अनुरूप नहीं मानते हुए अब स्पष्ट व्यवस्था लागू की गई है. सभी अधिकारी केवल अपनी आधिकारिक ई-मेल आईडी के माध्यम से ही बैठक में शामिल होंगे, जिससे प्रतिभागियों की पहचान सुनिश्चित होगी और समीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनेगी.

अधिकारी स्वयं होंगे बैठक में शामिल

नए निर्देशों के अनुसार प्रत्येक ऑनलाइन समीक्षा बैठक में मंडल स्तर से सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) तथा जनपद स्तर से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी स्वयं प्रतिभाग करेंगे. यदि किसी अपरिहार्य शासकीय कारण से वे उपस्थित नहीं हो सकते हैं, तो अपने स्थान पर किसी वरिष्ठ अधीनस्थ अधिकारी को विधिवत अधिकृत कर बैठक में भेजेंगे, ताकि किसी भी मंडल अथवा जनपद का प्रतिनिधित्व प्रभावित न हो.

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एक जनपद से एक ही अधिकृत लॉगिन

बता दे निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि एक ही जनपद या मंडल से अलग-अलग डिवाइस और अलग-अलग आईडी से बैठक में जुड़ने की व्यवस्था स्वीकार नहीं होगी. इस बात की भी जिक्र किया गया है कि यदि एक से अधिक अधिकारियों की उपस्थिति आवश्यक हो तो सभी अधिकारी एक ही स्थान पर बैठकर एक अधिकृत लॉगिन आईडी के माध्यम से बैठक में शामिल होंगे. इससे तकनीकी अव्यवस्था समाप्त होगी और समीक्षा अधिक सुव्यवस्थित बनेगी.

जवाबदेही के साथ तेज होगा क्रियान्वयन

बेसिक शिक्षा विभाग का मानना है कि वरिष्ठ अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति से समीक्षा बैठकों की गुणवत्ता बेहतर होगी, निर्णयों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित होगा और शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप योजनाओं की निगरानी तथा क्रियान्वयन में और अधिक गति आएगी.

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