मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत आपसी फूट, षडयंत्र के कारण गुलाम हुआ था. क्षेत्र, जाति व भाषा के नाम पर भारत को कमजोर करने वाली ताकतें आज भी फूट डाल रही हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म षड्यंत्र का माध्यम हो गया है. देशविरोधी ताकतें इसका दुरुपयोग कर भारत के खिलाफ अफवाहें फैला रही हैं. षड्यंत्र के तहत समाज को गुमराह करने करने का प्रयास हो रहा है. सीएम योगी रविवार को काकोरी ट्रेन एक्शन के 101वें वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में काकोरी शहीद स्मारक पर आयोजित शताब्दी समारोह कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.
राष्ट्रनायकों को सीएम ने दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रनायकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आज काकोरी ट्रेन एक्शन की 101वीं तिथि है. भारत माता के महान सपूतों ने ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिलाकर चुनौती दी थी कि भारत की धरती गुलामी को हरगिज नहीं बर्दाश्त करेगी. इन क्रांतिकारियों ने 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर से लेकर 1942 के ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ आंदोलन तक संघर्ष की लंबी श्रृंखला खड़ी की थी. अंग्रेज भारत के लोगों की गाढ़ी कमाई लूटकर ब्रिटेन ले जाना चाहते थे, लेकिन इसी स्थान पर 9 अगस्त 1925 को पं. राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खां, चंद्रशेखर आजाद, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी जैसे क्रांतिकारियों ने खजाने को अपने कब्जे में लेकर आजादी की लड़ाई को नई ऊंचाइयां प्रदान की थीं.
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मुख्यमंत्री ने क्रांतिकारी शचींद्र नाथ बख्शी व मन्मथ नाथ गुप्ता का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वे काशी में पैदा हुए थे. उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली. ब्रिटिशर ने उनकी जागीर को जब्त कर लिया था. शचींद्र नाथ सान्याल भी काशी में पैदा हुए और उन्होंने अंतिम सांस गोरखपुर में ली. पं. रामप्रसाद बिस्मिल, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी, अशफाक उल्ला खां, ठाकुर रोशन सिंह को फांसी दी गई. चंद्रशेखर आजाद ने कहा था कि आजाद हमेशा आजाद रहेगा, अंतिम दम तक अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते वह प्रयागराज की धरती पर शहीद हुए. इन क्रांतिकारियों का उद्देश्य भारत मां की आजादी के साथ ही गुलामी की बेड़ियों को तोड़कर अंग्रेजों को भारत से भगाना और देश को आजाद कराना था.
मंच पर मुख्यमंत्री का दर्द भी झलका
मंच पर मुख्यमंत्री का दर्द भी झलका. उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने तो काकोरी की घटना को डकैती कहा, लेकिन स्वतंत्र भारत में भी जिन लोगों के हाथों में सत्ता आई, उन्होंने भी काकोरी डकैती कांड के नाम पर इस घटना के क्रांतिकारियों को अपमानित किया. इन लोगों ने काकोरी ट्रेन एक्शन और चौरीचौरा की घटना को कमतर आंका. 1922 में गोरखपुर में चौरीचौरा की घटना हुई तो कांग्रेस ने आंदोलन स्थगित कर दिया और इससे मुंह मोड़ लिया. महामना मदन मोहन मालवीय ने चौरीचौरा की घटना में क्रांतिकारियों का मुकद्मा लड़ा.
सीएम योगी ने कहा कि अनेक क्रांतिकारियों को आजीवन कारावास दिया गया. महान क्रांतिकारी शचींद्र नाथ बख्शी व मन्मथ नाथ गुप्ता को आजादी के बाद जो सम्मान मिलना चाहिए था, नहीं मिला. इन्हें सजा कराने का पाप वकालत करने वाले तत्कालीन कांग्रेसी नेताओं ने किया था. जिन लोगों ने आमजन को अपने नायकों, क्रांतिकारियों से दूर रखा, उन्होंने भारत की युवा पीढ़ी से अन्याय किया. नायकों पर गौरव की अनुभूति का अवसर न देना नौजवान पीढ़ी को आदर्श, गौरव और प्रेरणा से विमुख करने जैसा है.
आजादी के बाद जिन लोगों ने सत्ता संभाली, उन लोगों ने क्रांतिकारियों को अपमानित करने का पाप किया. काकोरी के शहीदों के अलावा चंद्रशेखर आजाद, वीर सावरकर, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, रानी लक्ष्मीबाई, वीरांगना उदा देवी पासी, अवंती बाई, झलकारी बाई के नाम पर कोई स्मारक न बने, लोग इनका नाम भी न जानने पाएं, इसलिए इन क्रांतिकारियों के नाम पर संस्थाओं का नाम नहीं रखा गया. आजादी के बाद भी इसके लिए लगातार साजिशें की गईं.
PM मोदी ने दिया आजादी के नायकों को सम्मान- सीएम
सीएम ने पीएम मोदी का आभार जताते हुए कहा कि 2014 में सत्ता संभालने के बाद उन्होंने आजादी के नायकों को सम्मान दिया. बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर से जुड़े पंच तीर्थ, वीर सावरकर, रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खां के स्मारक को बढ़ाया गया. काकोरी की घटना को काकोरी ट्रेन एक्शन नाम देकर क्रांतिकारियों को सम्मान दिया. इन क्रांतिकारियों के नाम पर अब डाक टिकट जारी हो रहे और संस्थाओं के नाम रखे जा रहे हैं. वरना आजादी के बाद एक ही परिवार/खानदान के नाम पर सभी योजनाओं का नामकरण होता था.
मुख्यमंत्री ने किया आह्वान- गुमनाम नायकों को खोजें
मुख्यमंत्री ने आमजन का आह्वान किया कि हम सभी क्रांतिकारियों को खोजें. हमारे गांव, क्षेत्र, जनपद आदि में अनेक गुमनाम नायक होंगे, जिन्होंने ‘तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहें न रहें’ के भाव के साथ आजादी के लिए सर्वस्व समर्पित किया. आजादी के बाद सत्तालोलुप लोगों ने अपने वैभव को देखा. क्रांतिकारियों को भुला दिया गया, उन्हें पाठ्यक्रमों में स्थान नहीं दिया गया. देश, समाज के खिलाफ खूब षड्यंत्र हुआ और फिर से बांटने की साजिश प्रारंभ कर दी गई. सीएम ने अपील की कि क्रांतिकारियों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से जुड़ी बिखरी सामग्री को एकत्र करें. उनसे जुड़े स्मारकों की मरम्मत-सौंदर्यीकरण से जुड़ें और पुष्पांजलि देकर उनके प्रति सम्मान व्यक्त करें.
क्रांतिकारियों की स्मृति में एक वर्ष में अनेक कार्यक्रम
सीएम ने कहा कि क्रांतिकारियों के लिए देश की आजादी की लड़ाई सर्वोपरि थी. उनकी स्मृति को जीवंत बनाए रखने के लिए काकोरी में शताब्दी महोत्सव का आयोजन किया गया. एक वर्ष में क्रांतिकारियों की स्मृतियों में अनेक कार्यक्रम किए गए. काकोरी ट्रेन एक्शन से जुड़े परिवारों की वर्तमान पीढ़ी और देश की सुरक्षा के लिए बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के परिजनों को भी सम्मान दिया गया है. मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि विकसित व आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना तब साकार होगी, जब सभी के मन में राष्ट्र सर्वोपरि का भाव होगा. अपनी मातृभूमि, भाषा, स्वदेशी उत्पादों को लेकर लोगों को जागरूक करें. 15 अगस्त को स्वाधीनता दिवस है. इस दौरान हर घर में तिरंगा फहराना चाहिए और हर संस्था में वंदे मातरम का गान होना चाहिए.
इस दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, संस्कृति व पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, राज्यसभा सांसद ब्रजलाल, विधायक नीरज बोरा, ओपी श्रीवास्तव, जय देवी, योगेश शुक्ल, विधान परिषद सदस्य रामचंद्र प्रधान, लालजी प्रसाद निर्मल आदि मौजूद रहे.
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