उत्तराखंड में कैबिनेट विस्तार की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने नए-पुराने सभी मंत्रियों को एक साफ संदेश दे दिया है. सीएम ने कहा कि दफ्तरों में बैठकर रिपोर्टें पढ़ने का वक्त नहीं है, अब मैदान में उतरना होगा.

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दरअसल, बुधवार (25 मार्च) को कैबिनेट बैठक के बाद सीएम धामी ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिलों का नियमित दौरा करें और वहां चल रही विकास योजनाओं का खुद जाकर जायजा लें. यह महज एक औपचारिक आदेश नहीं था इसके पीछे साफ मंशा थी कि सरकारी योजनाएं कागजों से निकलकर आखिरकार उन लोगों तक पहुंचें जिनके लिए बनाई गई हैं.

'फाइल नहीं, जमीन पर जाकर देखो'

सीएम धामी ने बैठक में कहा कि जनपद स्तर पर अगर योजनाओं की लगातार निगरानी हो तो काम की गुणवत्ता अपने आप बेहतर होती है और पारदर्शिता भी आती है. लेकिन यह निगरानी तब ही कारगर होगी जब मंत्री खुद मौके पर जाएं, न कि अधिकारियों की बनाई रिपोर्ट पर भरोसा करके बैठे रहें.

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मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को विशेष रूप से कहा कि वे स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और आम लोगों से सीधे बात करें. जमीनी हकीकत को समझें. अक्सर होता यह है कि ऊपर तक जो रिपोर्ट आती है वह चमकदार होती है, लेकिन गांव में जाकर देखो तो तस्वीर कुछ और ही होती है. इसी खाई को पाटने के लिए यह पूरी कवायद है.

'अंतिम छोर का आदमी सरकार की प्राथमिकता'

सीएम ने बैठक में साफ कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि प्रदेश के अंतिम छोर पर बैठे अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे. पहाड़ी राज्य होने के नाते उत्तराखंड में यह चुनौती और भी बड़ी है. उन्होंने कहा कि दूरदराज के गांवों तक योजनाएं पहुंचती हैं या नहीं, यह दिल्ली या देहरादून में बैठकर नहीं जाना जा सकता.

इसीलिए मंत्रियों का जिलों में जाना सिर्फ एक राजनीतिक दौरा नहीं होगा. यह एक तरह का 'रियलिटी चेक' होगा जहां योजना की असली स्थिति सामने आएगी.

लापरवाही पर अधिकारियों की खैर नहीं

सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर आम जनता की शिकायतों और समस्याओं के समाधान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बरती गई तो उसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. संबंधित विभागों के अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी. यह बयान उन अफसरों के लिए सीधी चेतावनी है जो योजनाओं की प्रगति को कागजों पर चमकाकर दिखाते हैं लेकिन जमीन पर काम ठंडा पड़ा रहता है.

'विभाग मिलकर काम करें'

मुख्यमंत्री धामी ने बैठक में एक और अहम बात कही. उन्होंने कहा कि सड़क, पेयजल, ऊर्जा, सिंचाई और भवन निर्माण जैसे विभाग अगर आपसी तालमेल से काम करें तो परियोजनाएं समय पर पूरी होंगी और जनता को जल्दी लाभ मिलेगा. अक्सर देखा गया है कि एक विभाग सड़क बना देता है, दूसरा विभाग उसी को खोद देता है. यह समन्वय की कमी न सिर्फ पैसे बर्बाद करती है बल्कि जनता का भरोसा भी तोड़ती है.

साफ है संदेश!

कैबिनेट विस्तार के ठीक बाद यह निर्देश देना धामी सरकार का बड़ा कदम माना जा रहा है. नई टीम को शुरू से ही यह बताना कि काम का तरीका क्या होगा, यह सरकार के इरादे को जाहिर करता है. अब देखना यह है कि मंत्री जिलों में कितनी नियमितता से जाते हैं और यह दौरे महज फोटो खिंचवाने की औपचारिकता बनते हैं या सच में जमीन पर बदलाव लाते हैं.