उत्तराखंड में वायु प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से सचिवालय में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत राज्य स्तरीय वायु गुणवत्ता निगरानी समिति की बैठक आयोजित हुई. इस बैठक की अध्यक्षता प्रमुख सचिव (वित्त) रमेश कुमार सुधांशु ने की, जिसमें विभिन्न शहरों की वायु गुणवत्ता और स्वच्छता व्यवस्था की समीक्षा की गई.

Continues below advertisement

इस बैठक में देहरादून, ऋषिकेश और काशीपुर में वायु प्रदूषण की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई. प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपसी समन्वय के साथ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रदूषण के स्तर में और सुधार लाया जा सके. उन्होंने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन के लिए विशेष प्रयास करने और स्वच्छता मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया.

निर्माण स्थलों से होने वाले धूलजनित प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एमडीडीए के साथ समन्वय बनाकर निर्माण सामग्री को ढकने और नियमित रूप से पानी का छिड़काव करने के निर्देश दिए गए. इससे शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.

Continues below advertisement

अस्थायी आश्रय स्थलों पर सफाई व्यवस्था के निर्देश

चारधाम यात्रा को देखते हुए प्रमुख सचिव ने यात्रा मार्गों और अस्थायी आश्रय स्थलों पर सफाई व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि एनजीओ की सहभागिता के साथ चिन्हित स्थानों पर समानांतर प्रणाली के तहत सफाई कार्य संचालित किया जाए और इसकी नियमित निगरानी भी की जाए. इसके अलावा कूड़ा एकत्रीकरण के लिए वाहनों में डस्टबिन की व्यवस्था सुनिश्चित करने और आम लोगों को जागरूक करने के लिए ‘क्या करें, क्या न करें’ संबंधी पेम्पलेट लगाने के निर्देश भी दिए गए.

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026 के तहत कचरे के पृथक्करण (सेग्रीगेशन) को अनिवार्य रूप से लागू करने पर भी जोर दिया गया. बैठक में उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव पराग मधुकर धकाते ने वायु गुणवत्ता सुधार की प्रगति साझा की. उन्होंने बताया कि देहरादून में वर्ष 2019-20 की तुलना में 2024-25 में पीएम10 स्तर में 44.27 प्रतिशत सुधार दर्ज किया गया है. ऋषिकेश में 38.2 प्रतिशत और काशीपुर में 26.92 प्रतिशत सुधार हुआ है.

बैठक में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में काशीपुर में निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट (सी एंड डी) प्रोसेसिंग प्लांट के लिए प्रस्ताव जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए. इस दौरान वन विभाग के अधिकारी, नगर निगम और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी सहित अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे.