मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम को क्लीन चिट देते हुए कहा कि अंकिता भंडारी की हत्या के समय वह उत्तराखंड में नहीं थे. इसके साथ ही धामी ने इस मामले में साजिश की आशंका भी जताई.

Continues below advertisement

सीएम ने कहा कि मुझे लगता है कि भाई एक नाम बोल दिया ऑडियो से. ऐसा ही ऑडियो पेपर लीक के मामले में भी हुआ था. अब हमें तो यह लग रहा है कि यह कोई क्या है कि पेपर लीक में भी इसी प्रकार का ऑडियो बनाया जाता है. उसके बाद हंगामा किया जाता है. कहीं ऐसा तो नहीं कि बेटी अंकिता को बार-बार उसकी आत्मा को इस तरह से दुःखी करके राज्य के अंदर एक माहौल खराब करके अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं.

सीएम ने कहा कि राजनीति करने के और बहुत सारे रास्ते हैं. हम लोग राजनीति करने के लिए, उत्तराखंड की जनता के विश्वास के लिए काम कर रहे हैं. उत्तराखंड की जनता के लिए काम कर रहे हैं. आप अच्छे मुद्दे लाइए और इस मुद्दे पर हमारा बिल्कुल स्टैंड क्लियर है. हम हर जांच के लिए तैयार हैं.

Continues below advertisement

माहौल खराब करने का षडयंत्र रचा- CM धामी

धामी ने कहा कि इस प्रकरण में केवल एक ऑडियो में बोले गए नाम को लेकर पूरे प्रदेश का माहौल खराब करने का षडयंत्र रचा गया जबकि गौतम 10 से 20 सितंबर 2022 के दौरान प्रदेश में आए ही नहीं थे .

उन्होंने कहा, 'दिल्ली में हुई प्रेस वार्ता में हमारे प्रभारी जी (गौतम) का नाम लिया गया. पुलिस ने भी सत्यापित कर लिया कि 10 सितंबर से लेकर 20 सितंबर तक उनका उत्तराखंड में आना ही नहीं हुआ.'

मुख्यमंत्री ने कहा कि गौतम के सोशल मीडिया तथा फेसबुक पर भी उनका इस संबंध में पूरा रिकॉर्ड है . कांग्रेस सहित विपक्षी राजनीतिक एवं सामाजिक संगठन प्रदेश भर में 'वीआईपी' के खुलासे के लिए हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराए जाने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं.