UP News: बदलती जलवायु के इस दौर में उत्तर प्रदेश अब केवल आपदाओं का इंतजार नहीं कर रहा, बल्कि उनसे लड़ने की क्षमता (Resilience) विकसित कर रहा है. हालिया आंकड़ों के अनुसार, 2050 तक राज्य के औसत तापमान में  से  तक की वृद्धि होने का अनुमान है, जो खेती और स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा संकेत है.

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खेती और पानी पर संकट

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ 'कृषि' है. बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र पहले से ही सूखे की मार झेल रहे हैं, वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में बाढ़ की समस्या गंभीर बनी हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण सिंचित क्षेत्रों में उत्पादकता में 25% तक की कमी आ सकती है. इससे निपटने के लिए राज्य अब 'क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर' की ओर बढ़ रहा है, जिसमें कम पानी में उगने वाली फसलों और पराली प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है.

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सरकार की रणनीतिक पहल: UPCAMP और ग्रीन बजट

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने 'उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना' (UPCAMP) की शुरुआत की है. विश्व बैंक से समर्थित यह परियोजना वायु गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में 'हीट आइलैंड' प्रभाव को कम करने पर केंद्रित है. इसके अलावा, आगामी वित्तीय साल 2026-27 के बजट को 'ग्रीन ग्रोथ' मॉडल पर आधारित करने की योजना है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को प्राथमिकता दी जाएगी.

हरित आवरण और जल संरक्षण

राज्य ने 2030 तक करोड़ों पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है. 'उपवन योजना' के तहत शहरों में छोटे जंगल (Miyawaki forests) विकसित किए जा रहे हैं. साथ ही, 'स्पंज सिटी' का कॉन्सेप्ट अपनाया जा रहा है ताकि साला जल का संचयन हो सके और भूजल स्तर में सुधार आए.

जलवायु लचीलापन का अर्थ केवल पेड़ लगाना नहीं, बल्कि एक ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना है जो झटकों को सह सके. उत्तर प्रदेश जिस तरह से तकनीकी और नीतिगत बदलाव कर रहा है, वह भविष्य की चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक ठोस कदम है.