चारधाम यात्रा से पहले उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर NDMA और USDMA ने मिलकर प्रदेश के सात जनपदों उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी, देहरादून और हरिद्वार में एक साथ मॉकड्रिल आयोजित की गयी. इस अभ्यास में सभी संबंधित अधिकारी और सातों जिलों के जिलाधिकारी मौजूद रहे.

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हर साल चारधाम यात्रा के दौरान पहाड़ी रास्तों पर लाखों श्रद्धालु निकलते हैं. किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया के लिए यह अभ्यास जरूरी माना जाता है. इस बीच आपदा राहत में देरी को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है.

PM मोदी के दौरे से पहला गरमाई सियासत

इधर मॉकड्रिल की तैयारियां चल रही हैं, उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 14 अप्रैल के उत्तराखंड दौरे से ठीक पहले आपदा राहत राशि का मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है. पीएम इस दौरे में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करेंगे और देहरादून में जनसभा को भी संबोधित करेंगे.

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अगस्त 2025 में उत्तराखंड में भीषण आपदा आई थी. सितंबर में राज्य दौरे पर आए प्रधानमंत्री ने तत्काल राहत के तौर पर 1200 करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी. राज्य सरकार ने अपने स्तर पर नुकसान का आकलन कर 5700 करोड़ रुपये का मेमोरेंडम केंद्र को भेजा, जबकि PDNA रिपोर्ट में कुल नुकसान 15,000 करोड़ रुपये से भी अधिक बताया गया.

लेकिन पीएम के इस दौरे तक घोषित 1200 करोड़ में से एक भी रुपया राज्य तक नहीं पहुंचा और यही बात विपक्ष के लिए बड़ा हथियार बन गई है. विपक्षी दलों का सवाल है कि जब पीएम खुद उद्घाटन और जनसभाओं के लिए आ रहे हैं, तो आपदा पीड़ितों की राशि में देरी क्यों?

जल्द राहत राशि मिलने का दावा

आपदा मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है और बहुत जल्द राज्य को यह राशि मिल जाएगी. लेकिन विपक्ष इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं है और सरकार को घेरने का काम जारी रखे हुए है.