चारधाम यात्रा 2026 की शुरुआत से पहले ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरी सरकारी मशीनरी को हरकत में ला दिया है. गुरुवार को सचिवालय स्थित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार में उन्होंने यात्रा की तैयारियों को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली, जिसमें हेली सेवाओं से लेकर ट्रैफिक प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर डिजिटल निगरानी तक — हर पहलू पर बारीकी से चर्चा हुई और कड़े निर्देश जारी किए गए.
मुख्यमंत्री ने बैठक में साफ शब्दों में कहा कि इस बार यात्रा को हर दृष्टि से अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित, स्वच्छ और तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जाए. उन्होंने कहा, "देश और दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा हमारी व्यक्तिगत जिम्मेदारी है — इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं होगी."
हेली सेवाओं को लेकर सख्त रुख
बैठक में हेलीकॉप्टर सेवाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने जो रुख अपनाया, वह पिछले वर्षों के कड़वे अनुभवों की याद दिलाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि हेली सेवाओं के संचालन में व्यावसायिक सोच की जगह मानवीय संवेदनशीलता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए. निर्धारित SOP का पूरी सख्ती से पालन हो, सभी हेलीकॉप्टरों की नियमित मेंटेनेंस और फिटनेस जांच अनिवार्य रूप से हो तथा ऑपरेशनल ओवरलोडिंग से बचने के लिए सेवाओं को समय-समय पर पर्याप्त विश्राम दिया जाए.
अफवाह फैलाने वालों पर एफआईआर
सोशल मीडिया पर यात्रा को लेकर भ्रामक खबरें फैलाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने चेतावनी दी कि चारधाम यात्रा से जुड़ी कोई भी अफवाह या भ्रामक सूचना फैलाने वाले के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी. यह निर्देश इस बात का संकेत है कि सरकार यात्रा की छवि और श्रद्धालुओं के मनोबल को लेकर किसी तरह की ढील नहीं देना चाहती.
मुख्यमंत्री ने बीते वर्ष शुरू की गई 'ग्रीन एवं क्लीन चारधाम यात्रा' पर ज़ोर दिया और कहा कि यात्रा मार्गों पर पर्याप्त संख्या में प्लास्टिक कलेक्शन बॉक्स लगाए जाएं और प्लास्टिक के उपयोग पर पूरी तरह लगाम लगाई जाए. यात्रा मार्गों पर स्वच्छता, सौंदर्यीकरण और साइनेज को बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए गए. प्रमुख स्थलों पर आकर्षक सेल्फी प्वाइंट और थीम आधारित इंस्टॉलेशन विकसित करने की बात भी कही गई.
ट्रैफिक प्लान पहले से तैयार रखें
यात्रा मार्गों पर ट्रैफिक जाम एक पुरानी और गंभीर समस्या रही है. इस बार मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जाम की नौबत आनी ही नहीं चाहिए. प्रभावी ट्रैफिक प्लान पहले से तैयार किया जाए और वैकल्पिक मार्गों की पहचान कर उन्हें चालू हालत में रखा जाए. यात्रा मार्ग पर CCTV कैमरे पूरी तरह सक्रिय रखे जाएंगे और जरूरत पड़ने पर AI आधारित निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी.
भीड़ प्रबंधन के लिए स्लॉट मैनेजमेंट सिस्टम और रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग को प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए घंटों लाइन में न खड़ा रहना पड़े. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रणाली को और सरल बनाने तथा भीड़भाड़ वाले केंद्रों पर अतिरिक्त बूथ लगाने के निर्देश भी दिए गए.
स्वास्थ्य और जरूरी सुविधाओं का इंतजाम
यात्रा मार्गों पर पर्याप्त मेडिकल यूनिट्स और जरूरत पड़ने पर अस्थायी अस्पताल स्थापित किए जाएंगे. पशुओं के उपचार के लिए पशु चिकित्सालयों की संख्या और सुविधाएं भी बढ़ाई जाएंगी. CSR और अन्य संसाधनों के जरिए स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी. इसके अलावा शौचालय, विश्राम स्थल (शेल्टर) और अन्य बुनियादी सुविधाओं के व्यापक विकास के निर्देश भी दिए गए.
मुख्यमंत्री ने कहा यात्रा मार्ग पर रसोई गैस, केरोसीन, पेट्रोल और डीजल की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना अनिवार्य है. दैनिक आधार पर मॉनिटरिंग की जाए. तीर्थयात्रियों से मनमाने दाम वसूलने वालों पर कार्रवाई हो. यात्रा मार्ग की हर दुकान पर रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से प्रदर्शित हो. प्रशासन स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच समन्वय बनाकर समस्या का समाधान निकाले.
आपदा से निपटने को SDRF-NDRF अलर्ट पर
पहाड़ी इलाकों में आपदा का खतरा हमेशा बना रहता है. इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की पूर्व पहचान कर वहां आवश्यक संसाधन तैनात करने के निर्देश दिए. SDRF, NDRF और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए तथा 24x7 कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन को हर समय सक्रिय रखा जाए. मौसम आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम को भी और मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए.
मुख्यमंत्री ने यात्रा मार्गों पर गड्ढे तुरंत भरने और सड़क व्यवस्था को दुरुस्त रखने पर जोर दिया. साथ ही परिवहन विभाग को निर्देश दिए कि सभी वाहनों के फिटनेस प्रमाण पत्र, ग्रीन कार्ड और ट्रिप कार्ड समय पर उपलब्ध कराए जाएं.
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