Chandrashekhar Azad Statement: सुप्रीम कोर्ट ने आज (1 अगस्त) को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कोटे के अंदर कोटा बनाने की मंजूरी दे दी है. सुप्रीम कोर्ट के सात जजों ने संविधान पीठ ने फैसला सुनाया है. सात जजों की संविधान पीठ में CJI डी वाई चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस बी आर गवई, विक्रम नाथ, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी, जस्टिस पंकज मिथल, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा शामिल हैं. अब इसको लेकर नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने विरोध जताया है.
आजाद समाज पार्टी के मुखिया और नगीना सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा, ''सुप्रीम कोर्ट के सात जजों में से कितने दलित, आदिवासी थे? क्या उन्हें हमारे दर्द का एहसास है? सबसे पहले वर्गीकरण सुप्रीम कोर्ट से शुरू होना चाहिए. जाति जनगणना करें और संख्या के आधार पर हिस्सा दें.''
'क्यासुप्रीमकोर्टकेजजोंकोहमारेदर्दकाएहसासहै?'चंद्रशेखर आजाद ने जजों पर सवाल खड़ा करते हुए पूछा कि क्या उनको हमार पीड़ा का एहसास है. दर्द, आर्थिक स्थिति का, समाजिक स्थिति का एहसास है और जो ज़ुल्म हमपे होता हो उसका एहसास है. उन्होंने कहा कि क्या एससी-एसटी के लोगों से बेहतर एससी-एसटी के बारे में कोई सोच सकता है. अगर सोच सकता है कि 73 सालों में क्यों नहीं सोचा.
संख्याकेआधारपरआरक्षणकीमांग चंद्रशेखर आजाद ने सवाल पूछते हुए कहा कि है कहीं आरक्षण. निजीकरण इतना कर दिया गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कभी कुछ कहा. उन्होंने कहा कि सबसे पहले वर्गीकरण सुप्रीम कोर्ट से स्टार्ट हो. जब चंद्रशेखर आजाद से पूछा गया कि क्या कोटे के अंदर कोटा होना चाहिए या नहीं? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि संख्या की जनगणना कर लो. 15 प्रतिशत ही रह गई है क्या? क्या पता 20-25 प्रतिशत पहुंच गई हो. 15 प्रतिशत में से देना चाहते हो तो संख्या के आधार पर हिस्सा दे दो न? जिसकी जितना संख्या उसको उतना प्रतिशत हिस्सा देना चाहिए. ऐसे में किसी के साथ कोई धोखा नहीं होगा.
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