देशभर में आगामी जनगणना को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. जनगणना अधिनियम 1948 के तहत जारी नए दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों की अनदेखी करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. भारत के महापंजीयक द्वारा उत्तराखंड समेत सभी राज्यों के जनगणना निदेशालयों को इस संबंध में विस्तृत सर्कुलर जारी किया गया है.

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इस महीने शुरू होने जा रही जनगणना के पहले चरण में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने कर्तव्यों का सही तरीके से पालन नहीं करता है, तो उसे तीन साल तक की सजा हो सकती है. साथ ही, उस पर आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है. यह प्रावधान खासतौर पर उन कर्मचारियों के लिए लागू होगा जो जानबूझकर काम में लापरवाही बरतते हैं, गलत जानकारी दर्ज करते हैं या जनगणना से जुड़ी गोपनीय सूचनाओं को बिना अनुमति साझा करते हैं.

10 अप्रैल से शुरू होगी मकान स्वगणना की प्रक्रिया

जनगणना के पहले चरण के तहत 10 अप्रैल से ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से मकान स्वगणना की प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि 25 अप्रैल से 24 मई तक मकान सूचीकरण और गणना का कार्य किया जाएगा. इस दौरान नियुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करना होगा.

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लापरवाह कर्मचारियों पर होगा एक्शन

कानून के तहत यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई कर्मचारी अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही करता है, अनुचित प्रश्न पूछता है या गलत डेटा तैयार करता है, तो वह दंड का भागी होगा. इसके अलावा, जनगणना से जुड़े दस्तावेजों को छिपाना, नष्ट करना या उनमें हेरफेर करना भी गंभीर अपराध माना जाएगा, जिसके लिए सख्त सजा का प्रावधान है.

आम नगरिकों पर भी लगेगा जुर्माना

सिर्फ अधिकारी ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी इस अधिनियम के तहत कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं. यदि कोई व्यक्ति जनगणना अधिकारी द्वारा पूछे गए सवालों का सही उत्तर देने से इनकार करता है या जानबूझकर गलत जानकारी देता है, तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा, जनगणना कार्य में बाधा डालना, अधिकारी को किसी घर या स्थान में प्रवेश से रोकना या जनगणना के लिए लगाए गए चिन्हों को हटाना भी दंडनीय अपराध है.

यदि किसी मकान मालिक, किरायेदार या संस्थान के प्रबंधक को जनगणना फॉर्म भरने के लिए कहा जाता है और वह बिना उचित कारण के ऐसा नहीं करता या गलत जानकारी देता है, तो उस पर भी आर्थिक दंड लगाया जाएगा. साथ ही, जनगणना कार्यालय में बिना अनुमति प्रवेश करना भी नियमों के खिलाफ माना गया है.

सख्त प्रावधानों से पारदर्शी होगी जनगणना

अधिकारियों का कहना है कि इन सख्त प्रावधानों का उद्देश्य जनगणना प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाना है. सही आंकड़े देश की योजनाओं और नीतियों के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

जनगणना निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, इस अभियान की सफलता के लिए अधिकारियों और आम जनता दोनों का सहयोग जरूरी है. उन्होंने कहा कि सभी को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए ईमानदारी से इस प्रक्रिया में भाग लेना चाहिए, ताकि देश को सही और विश्वसनीय आंकड़े मिल सकें.