उत्तर प्रदेश के बलिया की रसड़ा विधानसभा से बहुजन समाज पार्टी के विधायक उमा शंकर सिंह का आज दिल्ली फोर्टिस अस्पताल में निधन हो गया. वे काफी समय से ब्लड कैंसर से पीड़ित थे. उनके निधन से उनके परिजनों और करीबियों में शोक की लहर दौड़ गयी है.
उमाशंकर सिंह ने राजनीति की शुरुआत छात्र संघ चुनावों से की. 1991 से अब तक वे लगातार राजनीति में सक्रिय थे.वे लगातार तीन बार से बसपा के विधायक थे, उन्होंने अपने पीछे एक पुत्र और एक बेटी को छोड़ा है.
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राजनीतिक सफर-छात्र संघ अध्यक्ष से बसपा के MLA तक
उमाशंकर सिंह का जन्म बलिया के खनवर गांव में 2 जनवरी 1971 को हुआ था. इनके पिता घुरहू सिंह सेना से रिटायर थे. पत्नी का नाम पुष्पा सिंह है. छात्र जीवन से ही राजनीति में कदम रख दिया था. 1991 में सतीश चन्द्र कोलेगे बलिया में छात्र संघ का चुनाव जीता, इसके बाद 2000 के आसपास बलिया में जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए.
2011 में बसपा ज्वाइन की
उमाशंकर सिंह ने 2011 में बहुजन समाज पार्टी का हाथ थामा. इसके बाद वे बसपा से ही 2012, 2017 और 2022 में रसड़ा से विधायक बने. 2022 में वे बसपा के अकेले विधायक थे. स्थानीय स्तर पर उन्होंने कई कार्य किये, जिससे जनता में उनका सीधा जुड़ाव था. स्थानीय लोग उन्हें गरीबों का मसीहा और राबिनहुड जैसी संज्ञा देते थे.
बसपा में उमाशंकर सिंह को मायावती के करीबियों में गिना जाता था. पारिवारिक समारोह में बसपा सुप्रीमो खुद शामिल होने पहुँचती थीं. चूंकि बीते विधानसभा चुनाव में अकेले विधायक थे बसपा के इसलिए और नजदीकियां बढ़ गयीं थीं. उनके निधन से बसपा को भी झटका लगा है.
लंबे समय से थे बीमार
उमाशंकर सिंह ब्लड कैंसर से पीड़ित थे, उनका इलाज कई जगह हुआ. अमेरिका में भी सर्जरी करवाई गयी थी. इन दिनों फोर्टिस अस्पताल में इलाज चल रहा था. इस बीच बुधवार शाम उनके निधन की खबर से रसड़ा में शोक पसर गया.
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