UGC के नए नियमों के विरोध के बीच अब पूर्व राज्यपाल और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र ने भी मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने यूजीसी के नए नियमों को गलत बताया और कहा कि इससे देश में भेदभाव और बढ़ेगा. अगर ये वापस नहीं किया गया तो हम लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध करेंगे. 

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बीजेपी नेता कलराज मिश्र ने यूजीसी के नए नियमों का विरोध करते हुए पत्रकारों से बात की और कहा कि इस कानून का वापस लेना ही पड़ेगा. अगर वापस नहीं हुआ तो हम लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखेंगे, हम सामंजस्य स्थापित करके किस तरह चीजों को ठीक किया जाए इसकी कोशिश करेंगे. 

'यूजीसी के नियमों से और बढ़ेगा भेदभाव'

कलराज मिश्र ने कहा कि जिस प्रकार का ये नियम आया है उससे से साफ़ लगता है कि सबके बीच में समानता की स्थिति होनी चाहिए, भेदभाव नहीं होना चाहिए. इन नियमों से निश्चित रूप से भेदभाव को और आगे बढ़ाने का कुचक्र बन गया है. 

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पहले एससी एसटी की भेदभाव संबंधित शिकायतों को प्रावधान था वो कर सकते थे. लेकिन, उसमें कितनी झूठी किसी सही है ये तो विश्लेषण का विषय है. लेकिन अब ओबीसी को भी जोड़ा गया है तो स्वाभाविक रूप से लगता है कि बाकी सभी को क्यों नहीं जोड़ा जाए? किसी के साथ भी भेदभाव हो, चाहें कोई भी हो चाहें सवर्ण, एससी एसटी या ओबीसी हो तो वो शिकायत करने का अधिकारी है. 

पूर्व राज्यपाल ने कहा कि अगर झूठी शिकायतें की गई है तो दंडात्मक प्रावधान होना चाहिए. यूजीसी की गाइडलाइंस जो बात सामने आई है उसमें 118 फीसद शिकायतों की बढ़ोतरी हुई है. लेकिन, विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से ये न के बराबर है. निवारण समिति ने कहा है कि इसमें ज्यादातर शिकायतों का निस्तारण किया गया है लेकिन इनमें झूठी शिकायतें कितनी है उसका कोई विवरण नहीं है. इससे तो भेदभाव को और बढ़ावा दे दिया गया है. 

बता दें कि यूजीसी के नए नियमों को देशभर में जबरदस्त विरोध देखने को मिल रहा है. लखनऊ में छात्रों ने इसके विरोध में नारेबाजी की तो वहीं सवर्ण सेना भी मैदान में उतर आई है.  

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