पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं और इनमें से तीन पर बीजेपी ने भगवा लहरा दिया है. जल्द ही पश्चिम बंगाल और असम में शपथ ग्रहण समारोह संपन्न हो जाएगा. इसके बाद बीजेपी का पूरा फोकस उत्तर प्रदेश पर रहने वाला है. बंगाल और असम में शपथ ग्रहण समारोह के बाद बीजेपी यूपी में बड़ा बदलाव करने जा रही है. देश की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने वाले उत्तर प्रदेश के 2027 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर ही यह बदलाव किए जाएंगे.

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इसी दिशा में उत्तर प्रदेश में योगी मंत्रिमंडल के विस्तार और प्रदेश इकाई में बदलाव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं. खबरें हैं कि 7 मई के बाद कभी भी मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा सकता है. योगी मंत्रिमंडल के लिए नामों की सूची पर काम शुरू कर दिया गया है, लेकिन बीजेपी मंत्रिमंडल विस्तार में ज्याद बदलाव करने के मूड में नहीं है. हालांकि, अटकलें हैं कि मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है और कुछ ही पुराने चेहरे हटाए जा सकते हैं. इसका उद्देश्य जातीय समीकरण को साधना है. 

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मंत्रिमंडल को भरने की तैयारी तेज

बीजेपी 2027 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर ही मंत्रिमंडल का विस्तार करने पर विचार कर रही है. वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल में 54 मंत्री हैं. प्रदेश के मंत्रिमंडल की क्षमता 60 सीटों की है और अभी 6 सीटें खाली हैं जिन्हें भरने पर फोकस किया जाएगा.  वर्तमान के मंत्रिमंडल में ज्यादा बदलाव न करने का उद्देश्य राज्य सरकार में जातीय समीकरणों के संतुलन को बनाए रखना है. अलीगढ़ की सुरक्षित सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर का नाम मंत्री पद के लिए चर्चा में है. इसके अलावा सुरेंद्र दिलेर वाल्मीकि समाज से ताल्लुक रखते हैं.  इस तरह मंत्रिमंडल में एक वाल्मीकि चेहरा भी शामिल हो सकता है. ब्राह्मण जाति से रायबरेली के मनोज पांडे और मथुरा विधानसभा क्षेत्र से श्रीकांत शर्मा का नाम भी मंत्री पद के लिए चर्चा में है.  इसके अलावा  पिछड़ी जाति (OBC) जाति से हंसराज विश्वकर्मा का नाम भी मंत्रीपद के लिए चर्चा में हैै. 

बढ़ सकती है महिलाओं की भागीदारी 

इसके अलावा बीजेपी योगी की टीम में महिलाओं की भागीदारी को भी बढ़ाने पर विचार कर रही है. फतेहपुर से तीन बार विधायक रहीं कृष्णा पासवान को मंत्री बनाया जा सकता है, जिससे महिला के साथ-साथ दलित समीकरण को साधा जा सके. इसके अलावा महमूदाबाद की विधायक आशा मौर्य को भी मंत्री बनाने की चर्चा है. आशा मौर्य पिछड़ी जाति (OBC) से हैं.  जानकारी के लिए बता दें कि पिछले कुछ समय से बीजेपी यूपी को लेकर दिल्ली से लेकर लखनऊ तक कई बैठकें कर रही थी. इसी दिशा में 12 से 13 अप्रैल के बीच लखनऊ में रहते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने पूर्व प्रदेश अध्यक्षों और वरिष्ठ मंत्रों का फीडबैक लिया था. इसी आधार पर संगठन और सरकार में बदलावों का प्रारूप तैयार किया गया है. 

प्रदेश संगठन में भी बड़े बदलाव की तैयारी

मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद प्रदेश संगठन में बदलाव के लिए प्रस्तावित नामों की सूची केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दी गई है. इसकी जानकारी यूपी के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने दी. दरअसल, पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से ही नई प्रदेश कार्यकारिणी बनाने को लेकर चर्चा थी, लेकिन अब इसे जल्द से जल्द बनाने को लेकर काम शुरू कर दिया गया है. चाहे मंत्रिमंडल का विस्तार हो या प्रदेश में संगठन का बदलाव बीजेपी जातीय समीकरणों का खास ख्याल रख रही है. 

गौर करें तो दिसंबर 2025 में जब केंद्रीय वित्तय राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश में बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, तभी से अटकलें थीं कि बीजेपी ने 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए ही उन्हें यह कमान सौंपी है.  पंकज पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय के बड़े चेहरे माने जाते हैं और राज्य में कुल आबादी में OBC समुदाय की हिस्सेदारी 45 से 50 प्रतिशत मानी जाती है. पंकज की पूर्वांचल में भी मजबूत पकड़ मानी जाती है. महाराजगंज से वो सात बार संसद रहे हैं और वो पूर्वांचल में एक अहम कुर्मी नेता भी हैं. 

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बीजेपी का फोकस यूपी के जातीय समीकरणों पर क्यों है?

दरअसल, साल 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को 80 में से लेवल 33 सीटें ही मिली थीं और समाजवादी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. इसकी वजह समाजवादी पार्टी का PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति को माना गया था. बीजेपी इसी की काट के लिए गैर-यादव OBC समुदायों जैसे कुर्मी, निषाद, मौर्य, शाक्य, कुशवाहा और अन्य पिछड़ी जातियों को अपने साथ जोड़ने में जुट गई है. अब मंत्रिमंडल में विस्तार और प्रदेश संगठन में PDA पर फोकस कर बीजेपी यही संदेश देने की कोशिश कर रही है कि पार्टी में दलित और पिछड़ा वर्ग के साथ-साथ अन्य जातियों को भी महत्व दिया जाता है.