उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अब राजनीतिक पार्टियों ने अपनी रणनीति को जमीन पर उतराने का काम शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में बीजेपी ने भी कमर कस ली है. बीजेपी उन बूथों पर विशेष तौर पर काम करेगी, जिन्हें लोकसभा या विधानसभा चुनाव में हारी हो. पार्टी अब हर बूथ की सामाजिक संरचना के हिसाब से माइक्रो प्लान तैयार कर रही है. इसके तहत बूथ कमेटियों में उस बूथ पर मौजूद सभी प्रमुख जातियों और सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की तैयारी है.

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पार्टी की रणनीति है कि जिस समाज तक पहुंच बनानी है, उसी समाज के व्यक्ति को बूथ कमेटी में जिम्मेदारी दी जाए. इससे स्थानीय स्तर पर उस समाज के लोगों से संपर्क बढ़ाने और उन्हें पार्टी से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है.

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राष्ट्रीय महामंत्री की बैठक के बाद शुरू हुई तैयारी

राष्ट्रीय महामंत्री और यूपी चुनाव के प्रभारी विनोद तावड़े ने 6 सितंबर को चुनाव की रणनीति के लिए संगठन के साथ बैठक की थी. बैठक में बूथ स्तर की रिपोर्ट देखी गई थी. पार्टी के सामने चुनौती उन इलाकों में है, जहां विपक्ष PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक), संविधान और आरक्षण जैसे मुद्दों के जरिए सामाजिक गोलबंदी की कोशिश कर रहा है. इसी के जवाब में तावड़े ने बूथ स्तर तक पहुंच मजबूत करने पर जोर दिया था. उन्होंने पदाधिकारियों से कहा था कि किसी बूथ पर किसी जाति की संख्या कम होने के बावजूद उससे संपर्क जरूरी है.

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18 हजार बूथ पर काम

बीजेपी 2022 विधानसभा चुनाव में 18 हजार बूथ पर हारी या कम वोट पाई थी. यही हाल 2024 के लोकसभा चुनाव में भी रहा था. अब इन बूथों पर पार्टी 2027 की तैयारी के लिहाज से चुनौती वाले बूथों की श्रेणी में रखते हुए विशेष रणनीति बनाने पर काम शुरू किया है. भाजपा का माइक्रो प्लान मूल रूप से 'हर बूथ पर हर समाज तक पहुंच' की रणनीति पर आधारित है. 

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