उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कानपुर जिले के बिकरू नरसंहार मामले में आरोपी और विकास दुबे के ड्राइवर राम सिंह को जमानत दे दी है.न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने इस आधार पर जमानत मंजूर की कि इसी तरह की स्थितियों वाले अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत पर रिहा किया जा चुका है.

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बता दें कि दो जुलाई, 2020 की रात गैंगस्टर विकास दुबे द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में पुलिस उपाधीक्षक देवेन्द्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों की मृत्यु हो गई थी. यह घटना तब घटी जब पुलिस टीम, दुबे को गिरफ्तार करने के लिए बिकरू गांव में उसके घर पर छापा मारने गई थी.

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इसके बाद, उज्जैन में गिरफ्तार विकास दुबे को 10 जुलाई, 2020 को कानपुर लाते समय पुलिस वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गई और हिरासत से भागने के प्रयास में विकास दुबे मारा गया. आरोपी राम सिंह के खिलाफ कानपुर के चौबेपुर पुलिस थाना में हत्या और हत्या के प्रयास की सुसंगत धाराओं में आपराधिक मामला दर्ज किया गया था.

यह था जमानत देने का आधार 

जमानत देते हुए अदालत ने मंगलवार को कहा, “याचिकाकर्ता के आपराधिक इतिहास के बारे में गैंगस्टर अधिनियम के तहत दर्ज मामले को छोड़कर बाकी सभी मामलों की जानकारी दी गई. अन्य सभी मामलों में वह जमानत पर है। गैंगस्टर अधिनियम के तहत अन्य आरोपियों के साथ ही उसे भी दोषी ठहराया गया था और अन्य आरोपी जमानत पर रिहा हैं.”

सिर्फ अपराधिक इतिहास पर जेल में नहीं रखा जा सकता 

अदालत ने कहा, “इस अदालत का मानना है कि यदि जमानत का मामला बनता है तो किसी आरोपी को केवल उसके आपराधिक इतिहास के आधार पर जेल में नहीं रखा जा सकता.” हालांकि, अदालत ने जमानत देते हुए कुछ शर्तें भी लगाईं जैसे कि वह साक्ष्य से छेड़छाड़ नही करेगा या गवाहों को नहीं धमकाएगा और जरूरत पड़ने पर ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश होगा.

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