देहरादून, एबीपी गंगा। प्रदेश के पंचायत राज संशोधित नियमावली पर राज्य सरकार को नैनीताल हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी बड़ा झटका लगा है। बीते दिनों हाइकोर्ट का पंचायत चुनाव में दो बच्चे की बाध्यता खत्म करने के फैसले पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के बाद हाइकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। यानी हाइकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी राज्य सरकार को निराशा हाथ लगी है।

वहीं सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बाद भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी देवेंद्र भसीन ने बताया कि ये कानूनी प्रक्रिया है। और इस प्रक्रिया के तहत उच्चतम न्यायालय ने जो निर्देश दिए है। आयोग और सरकार उसका सम्मान करती है। और इसी व्यवस्था के तहत ही पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। साथ ही बताया कि इस मामले को लेकर उच्चतम न्यायालय में अभी और सुनवाई होनी है जिसके बाद अंतिम निर्णय आएगा।

वही राज्य सरकार पर हमला करते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने बताया कि राज्य सरकार हमेशा तुगलकी निर्णय ले रही है। सत्ता के मद में मदमस्त और अपार बहुमत की वजह से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए राज्य सरकार ने ऐसा कानून बनाकर प्रदेश के लोगो के संवैधानिक अधिकारों पर भी डाका डाला है। साथ ही बताया कि पंचायत चुनाव में राज्य सरकार ने दो बच्चों की बाध्यता रखी है लेकिन ये बाध्यता भविष्य के लिए होना चाहिए था। जिस उम्मीदवार के इस कानून के आने से पहले 3 बच्चे हो गए है। उसका कोई कसूर नही हैं।

जिसके बाद हाइकोर्ट ने भी सरकार के निर्णय को गलत ठहराया। इसके बाद भी राज्य सरकार, हाइकोर्ट के फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट चली गयी। और सुप्रीम कोर्ट से भी हाइकोर्ट के फैसले को यथावत रखते हुए राज्य सरकार के मुंह पर तमाचा मारने का काम किया है कि यदि सरकार असंवैधानिक कार्य करेगी तो न्यायालय उसे स्वीकार नहीं करेगी। लिहाजा कांग्रेस न्यायालय के इस निर्णय का स्वागत करती है। अब तीन बच्चे वाले उम्मीदवार भी चुनाव लड़ पाएंगे।