उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वाराणसी निवासी शैलेन्द्र तिवारी को गिरफ्तार किया है. पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि आरोपी औराई और चौरी थानों में दर्ज मुकदमों में वांछित था और लंबे समय से फरार चल रहा था. पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर उसे माधोसिंह रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया. इस कार्रवाई के बाद जिले में अवैध दवा कारोबार के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है.

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मध्य प्रदेश और राजस्थान में कोडीन युक्त सिरप से दर्जनों बच्चों की मौत के बाद केंद्र सरकार ने ‘Coldrif’, ‘Respifresh TR’ और ‘ReLife’ जैसे ब्रांडों में जहरीला रसायन डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) पाए जाने पर इनके उत्पादन और बिक्री पर देशभर में प्रतिबंध लगाया. उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) गठित कर सभी जिलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. इसके तहत भदोही जिले में कई थानों में एफआईआर दर्ज की गईं. पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पूरे प्रकरण की निगरानी अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल कर रहे हैं.

लाइसेंस दुरुपयोग और गिरफ्तारी की कार्रवाई

औषधि निरीक्षक एवं खाद्य सुरक्षा अधिकारी कुमार सौमित्र की रिपोर्ट में Apcores Syrup-100ml और New Phensedyl Syrup-100ml जैसे कोडीन युक्त सिरप के गैर-चिकित्सकीय उपयोग और नशे के तौर पर बिक्री की पुष्टि हुई थी. जांच में सामने आया कि लाइसेंस का दुरुपयोग कर Schedule-H (पर्चे वाली दवाएं) Schedule-H1 (अति-प्रतिबंधित दवाएं) श्रेणी की दवाओं को खुले बाजार में बेचा जा रहा था. इसी आधार पर औराई व चौरी थानों में दर्ज मुकदमों में वाराणसी के चौक थाना क्षेत्र के CK-5/20 भिखारीदास लेन निवासी 44 वर्षीय शैलेन्द्र तिवारी पुत्र अमरनाथ तिवारी को गिरफ्तार किया गया. औराई थाने में दर्ज मुकदमा संख्या 497/25 में बीएनएस की धाराओं 206, 318(4), 336(3), 340(2), 338 और 61(2) के साथ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21सी/27क/29(1) भी जोड़ी गई है.

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फर्जी बिलिंग से करोड़ों का लेनदेन

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वर्ष 2024 में उसे वाराणसी की दवा मंडी के एक व्यापारी ने दिल्ली की एक फर्म से जोड़ा था. कोडीन सिरप की सप्लाई केवल कागजों में दिखाने के लिए फर्जी ई-वे बिल बनाकर जीएसटी फाइल की जाती थी और प्रति बिल उसे 1 रुपये दिए जाते थे. आरोपी ने स्वीकार किया कि कागजों में लगभग 10 लाख बोतल कोडीन सिरप की सप्लाई दिखाई गई, जिससे उसके खाते में करीब 3 करोड़ रुपये आए. वर्ष 2025 में उसके खाते में कुल 12,13,38,102 रुपये का लेनदेन दर्ज हुआ, जबकि वास्तविक रूप से उसे केवल 12 से 15 लाख रुपये ही मिले.

अन्य आरोपियों पर भी केस, जांच जारी

पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि इस मामले में ओमप्रकाश कसेरा, अंशिका गुप्ता, दिलीप कुमार उमर और अमन कुमार के खिलाफ भी औराई व चौरी थानों में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं. सभी आरोपियों पर बीएनएस की धाराओं 318(4), 336(3), 338, 340(2) और 206(b) के तहत कार्रवाई की गई है. पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क की जांच जारी है और अवैध कोडीन सिरप की सप्लाई चेन से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की जाएगी.