उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में शहर के पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र स्थित पचपेड़िया रोड पर रविवार की शाम उस वक्त मातम में बदल गई, जब कबाड़ बीनकर अपने परिवार का पेट पालने वाली दो बच्चियों की बिजली की चपेट में आने से जान चली गई. मौत का यह तांडव बिजली के एक खंभे के पास लगे कूड़े के ढेर पर हुआ, जहां सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर लटक रहे मौत के तारों ने दो मासूमों को अपनी आगोश में ले लिया.

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कांशीराम आवास विकास कॉलोनी की रहने वाली काजल (पुत्री मौलबी) और करिश्मा (पुत्री अर्जुन) के लिए हर सुबह गरीबी से जंग लड़ने जैसी होती थी. रविवार को भी दोनों सहेलियां कंधे पर थैला टांगे पचपेड़िया रोड पर कबाड़ बटोरने निकली थीं. उन्हें क्या पता था कि जिस कूड़े के ढेर से वे अपनी रोजी-रोटी तलाश रही हैं, वहीं मौत बिजली बनकर उनका इंतजार कर रही है, प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, खंभे से झूलता हुआ एक नंगा तार कूड़े के संपर्क में था. जैसे ही बच्चियों ने वहां हाथ डाला, जोरदार धमाके के साथ दोनों करंट की चपेट में आ गईं और पल भर में सब कुछ शांत हो गया.

बिजली विभाग को लेकर आक्रोश

घटना के बाद मौके पर पहुंचे स्थानीय निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर था. लोगों ने बिजली विभाग को इस घटना का जिम्मेदार ठहराया है. स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पचपेड़िया रोड पर कई जगहों पर तार काफी नीचे लटके हुए हैं. इसकी लिखित और मौखिक शिकायतें कई बार की गईं, लेकिन विभाग कुंभकर्णी नींद सोया रहा. जिस खंभे के पास यह हादसा हुआ, वहां तारों का जाल मकड़ी की तरह फैला हुआ है. बारिश या नमी के मौसम में यहां अक्सर स्पार्किंग होती रहती थी.

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हादसे की खबर जैसे ही कांशीराम आवास पहुंची, वहां चीख-पुकार मच गई. काजल और करिश्मा के माता-पिता बदहवास हालत में मौके पर पहुंचे. अपनी बेटियों के बेजान शरीर को देखकर वे बार-बार बेहोश हो रहे थे. सूचना मिलते ही पुरानी बस्ती पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को नियंत्रित किया. पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है और परिजनों को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

बिजली विभाग से रिपोर्ट तलब

डीएसपी सत्येंद्र भूषण तिवारी ने इस मामले को लेकर बताया कि मामला संज्ञान में आया है. बिजली विभाग से रिपोर्ट तलब की गई है. यदि तारों के रख-रखाव में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित जेई और लाइनमैन के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

काजल और करिश्मा कोई आम बच्चे नहीं थे, वे अपने घरों के आर्थिक आधार थे. कबाड़ बेचकर जो चंद रुपये मिलते थे, उससे उनके घरों का चूल्हा जलता था. आज सिस्टम की एक गलती ने न केवल दो जानें लीं, बल्कि दो परिवारों के भविष्य पर भी अंधेरा छा दिया है.