बस्ती जिले में पिछले चार दिनों से चला आ रहा अभूतपूर्व, रोमांचक और सांसें रोक देने वाला हाईवोल्टेज ड्रामा आखिरकार शहनाइयों की गूंज और निकाह के पवित्र कबूलनामे के साथ शांत हो गया. अपनी मोहब्बत को पाने के लिए जान की बाजी लगाने वाली युवती नादिया, जिसे स्थानीय लोग अब टावर वूमेन के नाम से पुकारने लगे हैं, अपनी जिद में कामयाब रही. उसकी जिद और अटूट जुनून के आगे आखिरकार उसके प्रेमी और मंगेतर मेहताब को झुकना ही पड़ा. दोनों का निकाह स्थानीय मौलवी की मौजूदगी में पूरे रीति-रिवाज के साथ संपन्न करा दिया गया है.

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यह पूरा मामला केवल एक प्रेम कहानी का सुखद अंत नहीं है, बल्कि कानून व्यवस्था, सामाजिक दबाव और प्रशासनिक सूझबूझ का एक ऐसा बेजोड़ उदाहरण बन गया है जिसकी चर्चा पूरे उत्तर प्रदेश के गलियारों में हो रही है. महज 96 घंटों के भीतर दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में मोबाइल टावरों पर चढ़कर आत्महत्या की धमकी देने वाली नादिया ने पुलिस और जिला प्रशासन की नाक में दम कर रखा था.

क्या है पूरा मामला

घटनाक्रम की शुरुआत चार दिन पहले वाल्टरगंज थाना क्षेत्र से हुई थी, जहां नादिया अचानक एक गगनचुंबी मोबाइल टावर पर चढ़ गई. उसकी मांग थी कि उसके मंगेतर मेहताब को तुरंत मौके पर बुलाया जाए और उससे उसकी शादी कराई जाए. उस समय पुलिस और स्थानीय संभ्रांत लोगों ने किसी तरह मान-मनौव्वल कर और शादी का आश्वासन देकर उसे नीचे उतारा था लेकिन जब दो दिनों तक प्रेमी पक्ष की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और वे वादे से पीछे हटते दिखे, तो नादिया का धैर्य पूरी तरह जवाब दे गया. उसने हार मानने के बजाय इस बार रुदौली क्षेत्र में एक और ऊंचे टावर को चुना और उस पर चढ़ गई. इस दूसरे ड्रामे ने पुलिस प्रशासन के होश उड़ा दिए, क्योंकि इस बार नादिया किसी भी सूरत में बिना निकाह के नीचे उतरने को तैयार नहीं थी और उसने ऊपर से ही कूदने की चेतावनी दे डाली थी.

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जब मामला पूरी तरह से उलझ गया, टावर के नीचे सैकड़ों की भारी भीड़ जमा हो गई और किसी भी अप्रिय घटना की आशंका गहराने लगी, तब मौके पर पहुंचे पुलिस उपाधीक्षक (सीओ) सत्येंद्र भूषण तिवारी ने खुद कमान संभाली. उन्होंने स्थिति की संवेदनशीलता और लड़की के मानसिक तनाव को भांपते हुए तुरंत बल प्रयोग या सख्त कानूनी कार्रवाई के बजाय काउंसलिंग और संवाद का रास्ता अपनाया. सीओ सत्येंद्र भूषण तिवारी ने तुरंत प्रेमी मेहताब और उसके परिजनों को मौके पर तलब किया. उन्होंने बंद कमरे में मेहताब और उसके पिता के साथ लंबी कानूनी और व्यावहारिक बातचीत की. पुलिस क्षेत्राधिकारी ने उन्हें कड़े शब्दों में समझाया कि यदि युवती कोई आत्मघाती कदम उठा लेती है तो कानूनी पचड़ों, मुकदमों और अदालती कार्रवाइयों में उनका पूरा परिवार और भविष्य बर्बाद हो जाएगा. इसके विपरीत, यदि वे आपसी सहमति से शादी कर लेते हैं तो न सिर्फ एक लड़की की जान बचेगी, बल्कि दोनों परिवारों को सामाजिक सम्मान और मानसिक शांति भी मिलेगी.

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प्रेमी ने आधिकारिक रूप से युवती हो स्वीकार किया जीवनसाथी

सीओ की इस व्यावहारिक और कानूनी घुड़की-कम-समझाने का असर जादुई रहा. प्रेमी मेहताब और उसका परिवार आखिरकार नादिया की जिद और पुलिस की दलीलों के आगे आत्मसमर्पण करने को तैयार हो गया. मेहताब ने बिना किसी दबाव के शादी के लिए अपनी लिखित और मौखिक सहमति दे दी. इसके तुरंत बाद पास ही एक सुरक्षित और पवित्र स्थान पर स्थानीय मौलवी साहब को आमंत्रित किया गया. मौलवी ने निकाहनामा पढ़ा, जहां नादिया और मेहताब दोनों ने तीन बार 'कबूल है, कबूल है, कबूल है' कहकर एक-दूसरे को आधिकारिक रूप से अपना जीवनसाथी स्वीकार कर लिया.

किसी बॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं था पूरा घटनाक्रम

निकाह संपन्न होने के बाद वाल्टरगंज, रुदौली और पूरे बस्ती जिले के प्रशासनिक अमले ने राहत की गहरी सांस ली है. स्थानीय ग्रामीणों के लिए यह पूरा घटनाक्रम किसी बॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं था. जहां कुछ लोग नादिया के इस खतरनाक और जानलेवा कदम की आलोचना कर रहे हैं, वहीं आम जनता पुलिस उपाधीक्षक सत्येंद्र भूषण तिवारी की सूझबूझ और इस अनोखे हैप्पी एंडिंग की जमकर सराहना कर रही है. फिलहाल, नवविवाहित जोड़ा पुलिस संरक्षण और पारिवारिक रजामंदी के साथ अपने नए जीवन की शुरुआत कर चुका है.

हमारी प्राथमिकता पहले लड़की की जान सुरक्षित करना- डीएसपी

डीएसपी सत्येंद्र भूषण तिवारी ने कहा कि अगर पुलिस केवल बल प्रयोग या कानूनी डंडे का इस्तेमाल करती, तो शायद परिणाम आत्मघाती हो सकता था. हमारी प्राथमिकता पहले लड़की की जान सुरक्षित करना था. हमने मानवीय संवेदनाओं और दोनों परिवारों के भविष्य को ध्यान में रखकर बातचीत का रास्ता चुना, जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया.

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