बस्ती DM ने जिस ग्रामप्रधान पर भ्रष्टाचार का लिया एक्शन, समाज कल्याण अधिकारी ने उसे बना दिया ईमानदार
Basti News: उत्तर प्रदेश के बस्ती में जिस ग्राम प्रधान को डीएम ने अपनी रिपोर्ट में भ्रष्टाचारी बताते हुए उनकी शक्तियों की सीज कर दिया थी उसी प्रधान को समाज कल्याण अधिकारी ने क्लीन चिट दे दी.

उत्तर प्रदेश के बस्ती में जिस प्रधान को जिलाधिकारी ने खुद ही अपनी जाँच में भ्रष्टाचारी बताकर लीगल एक्शन लिया उसे उन्हें की जूनियर अधिकारी ने ईमानदारी का ब्रांड एंबेसडर घोषित कर दिया है. इसकी रिपोर्ट तैयार करके जब जिला पंचायत राज अधिकारी को भेजी गई तो उनका माथा भी चकरा गया है, अब उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि वे डीएम को इस रिपोर्ट को भेजे या दोबारा जांच के लिए वापस कर दें.
दरअसल बैदोलिया गांव की प्रधान ममता पर मेड़बन्दी के नाम पर बिना कोई कार्य कराए सरकारी धन के बंदरबांट का आरोप लगा था. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने एक विशेष कमेटी गठित की थी. इस कमेटी ने अपनी जांच में पाया था कि बिना धरातल पर काम हुए लगभग 8 लाख रुपये की धांधली की गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने 6 महीने पहले प्रधान के वित्तीय अधिकारों को सीज कर दिया था.
इस मामले में शिकायतकर्ता तिलकराम और दलसिंगार ने सीडीओ से मिलकर जांच को प्रभावित करने वाले अधिकारी पर कार्यवाही की मांग करते हुए किसी अन्य अधिकारी से प्रधान के घोटाले की अभिलेखीय और धरातलीय जांच कराने की मांग की. समाज कल्याण अधिकारी की जांच के दौरान गांव में दोनों पक्षों में जमकर विवाद भी हुआ.
डीएम की रिपोर्ट को समाज कल्याण अधिकारी ने पलटा
हैरानी की बात यह है कि जिस भ्रष्टाचार की पुष्टि डीएम द्वारा गठित कमेटी ने की थी, उसे जिला समाज कल्याण अधिकारी लालजी यादव ने अपनी जांच में सिरे से खारिज कर दिया. एक ही मामले में दो विरोधाभासी रिपोर्ट आने से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है. कमेटी की रिपोर्ट में गबन की पुष्टि हुई थी जिसके बाद प्रधान दोषी करार दी गई थी. मगर दोबारा जांच में समाज कल्याण अधिकारी ने प्रधान को क्लीन चिट दे दी.
जिला समाज कल्याण अधिकारी ने डीएम की गठित कमेटी की रिपोर्ट को किसी बाहरी प्रभाव में आकर दरकिनार किया है. सवाल यह उठ रहा है कि जब एक उच्च स्तरीय कमेटी भ्रष्टाचार की पुष्टि कर चुकी थी, तो किस आधार पर दोबारा जांच कर आरोपी को बचाने का प्रयास किया गया, अब देखना यह होगा कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' का दावा करने वाला प्रशासन इस दोहरी जांच की गुत्थी को कैसे सुलझाता है और सरकारी धन का गबन करने वालों पर क्या कार्रवाई होती है.
प्रधान पति ने आरोपों पर दी सफाई
इस मामले को लेकर जब एबीपी ने समाज कल्याण अधिकारी लालजी यादव से उनका पक्ष लेना चाहा तो वे कैमरे पर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया. वहीं जिला पंचायत राज अधिकारी घनश्याम सागर ने जांच रिपोर्ट के बारे में बताया कि पूर्व में एक कमेटी ने इस मामले की जांच कर चुकी है. जिसके बाद अंतिम जांच अब DSW ने की है, रिपोर्ट को डीएम के पास भेजी जाएगा.
वही प्रधान पति निलेश ने सभी आरोपों पर अपनी सफाई देते हुए दो टूक कहा कि गांव में दो परिवारों के बीच आपसी वर्चस्व की लड़ाई में उन्हें मोहरा बनाया जा रहा है. मगर अब वे दोषमुक्त है तो गांव के विकास के लिए अपनी मुहिम जारी रखेंगे.
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Source: IOCL
























