बाराबंकी में बाढ़ का तांडव, घाघरा नदी उफान पर; सैकड़ों गांव प्रभावित
बाराबंकी में घाघरा नदी के उफान से जनपद की तीन तहसीलों के सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं. यहां सड़कें, घर और गलियां पूरी तरह बाढ़ के पानी में डूब चुकी हैं.

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में घाघरा नदी अपने पूरे उफान पर है, शनिवार और रविवार को नेपाल से छोड़े गए साढ़े तीन लाख (दो बार ) पानी से बाढ़ के हालात बन गए हैं. जनपद की तीन तहसीलों के सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में हैं.
बाढ़ की चपेट में घिरे रामसनेहीघाट क्षेत्र के पांच गांवों की हालत खस्ता है, यहां घरम रास्ते और खेत अब पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं. यहां तक की पशुओं के सामने चारे की किल्लत हो रही है. प्रशासन ने इन गांवों में राहत और मदद पहुंचाना शुरू कर दी है.
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ग्राउंड जीरो पर एबीपी टीम
घाघरा नदी के बढ़ते पानी ने लोगों के सामने मुश्किलें पैदा कर दी हैं.एबीपी न्यूज की टीम बाढ़ के हालातों का जायजा लेने ग्राउंड जीरो पर पहुंची. अयोध्या होते हुए बाराबंकी में बाढ़ से घिरे इन गांवों में जाने के लिए मोटर बोट या छोटी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है. इन गांवों का संपर्क सड़क मार्ग से अब समाप्त हो गया है. घाघरा नदी का पानी घरों और सड़कों-गलियों में तक भर चुका है. ग्रामीणों का बाहर निकलना मुश्किल हो चुका है. उनके पशुओं की भी स्थिति खराब है. बाढ़ पीड़ितों को फिलहाल जलालपुर में सुरक्षित ठहराया गया है. जबकि टिकुरी , कोहिलाल, ढीमा,जलापूर तराई और गुनौली जैसे गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं.
ग्रामीणों का घर छोड़ने से इंकार- प्रशासन अलर्ट
बाढ़ग्रस्त गांवों में ग्रामीणों ने अपना घर छोड़ने से इंकार कर दिया है, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन की मुश्किलें बढ़ चुकी हैं. रघुराज सिंह ने बताया कि हमारे पशु भी हैं उन्हें कैसे गांव में किसके भरोसे छोड़ दें. इसके अलावा दशरथ देई और राम सागर भी अपना घर बार छोड़ने को तैयार नहीं हैं. प्रशासन पशुओं के चारे के लिए व्यवस्था कर रहा है.
राहत एवं बचाव कार्य जारी
जिला प्रशासन की टीमें लगातार बाढ़ग्रस्त इलाकों में लोगों को भोजन, दवा और पानी पहुंचा रहीं हैं. इसके अलावा उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भी ले जाया जा रहा है. लगातार बढ़ता पानी अब प्रशासन के लिए चुनौती बन चुका है.उधर ग्रामीणों की स्थिति भी खराब हो रही है.
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