देश को आज़ाद हुए करीब आठ दशक बीत गए, लेकिन उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के गढ़रियनपुरवा गांव में सोमवार को पहली बार अपने घरों में बिजली की रोशनी लोगो ने देखी. जिला मुख्यालय से महज आठ किलोमीटर दूर बसे इस गांव में जैसे ही विद्युत आपूर्ति शुरू हुई पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर चेहरे पर वर्षों के इंतज़ार के बाद राहत और खुशी साफ नजर आई.

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गांव के लोगो ने कहा कि यह दिन उनके लिए किसी सपने के पूरा होने से कम नहीं है. उन्होंने बताया कि गांव में बिजली न होने की वजह से शादी-ब्याह तक में मुश्किलें आती थीं. लोग रिश्ते लेकर आते थे लेकिन गांव में अंधेरा देखकर लौट जाते थे. उन्होंने जिलाधिकारी, बिजली विभाग के अधिकारियों और ग्राम प्रधान का आभार जताते हुए कहा कि आज हम सच मायने में आज़ाद भारत में कदम रख पाए हैं.

बच्चे अब बेहतर रोशनी में पढ़ सकेंगे

गांव की महिलाओं ने भी खुशी जाहिर की. एक महिला ने कहा कि अब उनके बच्चे रात में ढंग से पढ़ाई कर सकेंगे. पहले दीये और मोमबत्ती की कमजोर रोशनी में पढ़ना मजबूरी थी. उन्होंने बताया कि बिजली न होने के कारण गांव में लड़को की शादी तक मुश्किल हो जाती थी.

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ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2017 में गांव में बिजली के खंभे तो लगा दिए गए थे, लेकिन तार खिंचने और कनेक्शन मिलने में करीब नौ साल लग गए. इस दौरान कई बुजुर्ग बिजली देखने की उम्मीद में दुनिया से चले गए.

वन विभाग का क्षेत्र होने से लटका मामला

DM बाराबंकी शशांक त्रिपाठी ने बताया कि कुछ हिस्सा वन विभाग क्षेत्र में होने की वजह से वर्षों तक विद्युतीकरण अटका रहा. कई प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनें थीं. जिलाधिकारी ने डीएफओ और बिजली विभाग के अधिकारियों का सार्वजनिक रूप से धन्यवाद देते हुए कहा कि सबके सहयोग से आज यह संभव हो पाया.