भारत और नेपाल की सीमाएं सिर्फ भौगोलिक रूप से ही नहीं बल्कि दिलों से भी जुड़ी हैं लेकिन इस वक्त उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से सटी नेपाल सीमा पर हालात तनावपूर्ण नजर आ रहे हैं. इसकी वजह नेपाल सरकार का एक नया 'कस्टम नियम' है, जिसने सदियों पुराने 'रोटी-बेटी' के रिश्तों के बीच टैक्स का कांटा बो दिया है.

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नेपाल सरकार के फरमान से विवाद!

बहराइच के रूपईडीहा बॉर्डर के पास लोगों के गुस्से का शोर सुना जा सकता है. ये लोग हर दिन अपनी जरूरतों के लिए सरहद पार करते हैं लेकिन नेपाल सरकार के एक फरमान ने यहां विवाद खड़ा कर दिया है. कस्टम नियम को लेकर नेपाल की बालेन सरकार के इस नए फैसलों से दोनों देशों के बीच सहज संबंधों पर असर पड़ रहा है.

नेपाल सरकार का नया कस्टम नियम क्या?

अगर आप भारत से नेपाल 100 रुपये से ज्यादा का सामान ले जाते हैं, तो आपको कस्टम ड्यूटी यानी टैक्स देना होगा. इस नियम ने सीमावर्ती ग्रामीणों की कमर तोड़ दी है. यहाँ लोगों का रिश्ता ऐसा है कि सुबह की चाय का दूध भारत से जाता है और शाम की सब्जी नेपाल से आती है. बॉर्डर पर बढ़ती सख्ती, कस्टम ड्यूटी की वसूली ने दोनों देशों के बीच तनाव जैसी स्थिति पैदा कर दी है. कस्टम का ये नियम 15 अप्रैल 2026 को लागू किया गया है.

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व्यापार के साथ आपसी भरोसा भी प्रभावित

भारत और नेपाल की सीमा खुली जरूर है, लेकिन ये नया नियम एक ऐसी दीवार खड़ी कर रहा है जिससे व्यापार ही नहीं, बल्कि आपसी विश्वास भी प्रभावित हो रहा है. स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर नियमों में ढील नहीं दी गई, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे. बहरहाल लोग टैक्स वापस लेने की मांग कर रहे हैं. अब देखना यह है कि काठमांडू में बैठी सरकार जनभावनाओं को देखते हुए अपने कदम पीछे खींचती है या फिर यह विवाद और तूल पकड़ेगा. 

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