देश सेवा करते हुए एक और वीर सपूत ने परम बलिदान दे दिया. भारतीय वायुसेना के फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रशांत सिंह तोमर असम के जोरहाट एयरबेस पर एएन-32 मालवाहक विमान की लैंडिंग के दौरान हुए दुर्घटना में शहीद हो गए. हादसे की सूचना मिलते ही उनके पैतृक गांव कंडेरा, बागपत सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई.

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प्रशांत सिंह तोमर करीब छह वर्ष पहले भारतीय वायुसेना में पायलट के रूप में चयनित हुए थे. अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और देशभक्ति से उन्होंने वायुसेना में अपनी अलग पहचान बनाई थी. परिजनों के अनुसार उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा और आगे की पढ़ाई देहरादून में पूरी की थी. वे बेहद मिलनसार, मेहनती और सादगी पसंद युवा थे.

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परिवार में छाया गम, पिता सेना से सेवानिवृत्त

हादसे की खबर मिलते ही पूरे परिवार में कोहराम मच गया. प्रशांत के पिता उमेश तोमर भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं और वर्तमान में देहरादून के सैलाकुई क्षेत्र में रहते हैं. सूचना मिलते ही परिजन देहरादून से कंडेरा के लिए रवाना हो गए. प्रशांत के छोटे भाई अनुराग ने दुख व्यक्त करते हुए कहा, “भाई हमेशा देश की सेवा को सबसे ऊपर रखते थे. उनका बलिदान पूरे परिवार और गांव के लिए गर्व की बात है, लेकिन दर्द भी बहुत बड़ा है.”करीब दो वर्ष पहले प्रशांत का विवाह दिल्ली की ऐश्वर्या के साथ हुआ था. युवा पति की अकाल मृत्यु से नवविवाहिता विधवा ऐश्वर्या और समूचा परिवार गहरे सदमे में है.

कंडेरा गांव खोया अपना होनहार बेटा

ग्रामीणों ने बताया कि प्रशांत गांव के हर कार्यक्रम में शामिल होते थे और युवाओं को देशसेवा के लिए प्रेरित करते थे. कंडेरा गांव ने एक सच्चा देशभक्त खो दिया है. गांववासी शहीद की वीरता को हमेशा याद रखने और उनके परिवार के साथ खड़े रहने का संकल्प ले रहे हैं. शहीद के पार्थिव शरीर को गांव लाने की तैयारियां चल रही हैं. वायुसेना अधिकारियों के साथ परिवार लगातार संपर्क में है.

पूरे उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में शहीद प्रशांत सिंह तोमर को श्रद्धांजलि दी जा रही है. वायुसेना ने हादसे में विमान में लगी आग पर तुरंत काबू पा लिया था, लेकिन इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रशांत सिंह तोमर वीरगति को प्राप्त हो गए. उनका बलिदान देश कभी नहीं भूलेगा.

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