बागपत से एक बेहद सकारात्मक और प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां आस्था के साथ-साथ अब संवेदनशीलता और जिम्मेदारी भी देखने को मिल रही है. बागपत के मंदिरों में शिवलिंग पर चढ़ने वाला दूध अब बर्बाद नहीं होगा. उसी दूध से अब पशु-पक्षियों की फीडिंग की जाएगी. इस अनोखी और सराहनीय पहल की शुरुआत बागपत के परशुरामेश्वर मंदिर से जिलाधिकारी अमिता लाल ने की है. मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले दूध को इकट्ठा कराया गया और उससे दर्जनों कुत्तों और बंदरों को दूध पिलाया गया. खास बात यह रही कि डीएम अमिता लाल ने खुद कुत्तों को दूध पिलाकर इस मुहिम की शुरुआत की और समाज को एक मजबूत संदेश दिया.
बेसहारा पशु-पक्षियों को आहार
डीएम ने बताया कि सोशल मीडिया पर अक्सर मंदिरों में दूध की बर्बादी को लेकर तस्वीरें और वीडियो वायरल होते रहते थे. इसी बर्बादी को रोकने और पशु-पक्षियों को भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जीरो वेस्ट योजना के तहत यह कदम उठाया गया है. इस पहल से जहां एक ओर दूध कावेस्टेज रुकेगा, वहीं दूसरी ओर बेसहारा पशु-पक्षियों को आहार भी मिलेगा. बागपत प्रशासन की यह पहल न सिर्फ जिले के लिएबल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन सकती है.
'जीरो वेस्ट महोत्सव के रूप में मनाने का निर्णय'
आज जैसे जनपद बागपत में 'पुरा महादेव' एक मंदिर है जिसकी बहुत मान्यता है, लाखों लोग यहां पर आते हैं. इस बार हमने इसको 'जीरो वेस्ट महोत्सव' के रूप में मनाने का निर्णय लिया है. जगह-जगह हमने बहुत सारे ऐसे पॉइंट्स रखे हैं—डस्टबिन के भी और वाटर कियोस्क के भी—ताकि छोटी-छोटी जो पानी की बोतलें हैं, वो इस्तेमाल न हों. इसके अलावा जो फूल निकलते हैं, उसके लिए भी हम प्रोसेसिंग कर रहे हैं और एक-एक जो भी प्रोडक्ट निकलता है वहाँ मंदिर से, हम उसको सबको यूज कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि, इसी क्रम में हमने जो दूध चढ़ता है, उसको हम पहले पॉइंट पर कलेक्ट (इकट्ठा) करके अब उससे डॉग फीडिंग भी करा रहे हैं और गौशाला में जिन बछड़ों की माताएं नहीं हैं, उनको भी हम उपलब्ध करा रहे हैं. तो अभी तक, आज हमने ये एक्सपेरिमेंट शुरू किया और वो काफी सफल रहा है.
डीएम ने की खास अपील
अपील यही है कि जो भी हमारा बाई-प्रोडक्ट होता है, जो भी मंदिरों से निकलता है, उसको हम जरूर इस्तेमाल करें. बहुत सारे ऐसे जानवर हैं जो भूखे रह जाते हैं, तो ये ज़रूरी है कि हम उनको ये फीडिंग कराएं. ये दरअसल हम देखते थे कि काफी लोग इस पर टिप्पणी करते थे कि शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ जो दूध है, वो किसी ज़रूरतमंद को दे सकते थे. तो उसी क्रम में हमने सोचा कि क्यों न हम यहाँ से इसकी शुरुआत करें.
