उत्तर प्रदेश के बागपत में किसानों के मसीहा और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की 39वीं पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए. चौधरी चरण सिंह की कर्मभूमि रहे बागपत जिले के रंछाड गांव में रालोद कार्यकर्ताओं ने उनकी प्रतिमा को दूध से नहलाकर श्रद्धांजलि दी.

Continues below advertisement

चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 को हापुड़ की बाबूगढ़ छावनी के पास नूरपुर गांव में हुआ था. उन्होंने 1926 में मेरठ कालेज से कानून की डिग्री प्राप्त की और बागपत को अपनी कर्मस्थली बनाकर प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे. 29 मई 1987 को उनका निधन हुआ.

यह भी पढ़ें: UP News:योगी सरकार में स्पोर्ट्स कॉलेजों का बढ़ा क्रेज, 518 सीटों के लिए करीब 2600 आवेदन

Continues below advertisement

बागपत जनपद का छपरौली विधानसभा क्षेत्र चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक कर्मभूमि रहा है. यहीं से उन्होंने 1937 में विधायक बनकर सियासी सफर शुरू किया और वर्ष 1951 से 1974 तक लगातार विधायक बने. इसी दौरान वे दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, बाद में केंद्र में गृहमंत्री और 28 जुलाई 1979 को देश के प्रधानमंत्री भी बने.

किसानों के हित में बड़े फैसले

रालोद खेल प्रकोष्ठ के महासचिव डा. संजीव आर्य ने बताया कि चौधरी चरण सिंह ने किसानों के हितों के लिए जीवन भर संघर्ष किया. उनके कारण ही प्रदेश में जमींदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ और पटवारी पद को समाप्त कर लेखपाल पद का सृजन किया गया. भारतीय राजनीति में मील का पत्थर साबित हुए चौधरी साहब के विरोधी भी उनकी ईमानदारी के कायल रहे. बागपत के लोग चौधरी चरण सिंह को अपना घर और यहां के लोगों को अपने निजी परिवार मानते थे. वे अक्सर कहते थे कि बागपत ही उनका घर है और यहां के लोग उनके परिवार के सदस्य हैं.

भारत रत्न से सम्मान

रालोद कार्यकर्ता रविंद्र हट्टी, सुभाष नैन, विनय राणा ने बताया कि फरवरी 2024 में चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने की घोषणा के साथ उनकी कर्मभूमि बागपत में अपार उत्साह देखने को मिला था. लोगों ने एक दूसरे को गुड़ खिलाकर मुंह मीठा कराया. बागपत के लोगों की जुबान पर चौधरी चरण सिंह आज भी जिंदा है और वे उनके दिलों में बसते हैं. रंछाड़ गांव में चौधरी चरण की प्रतिमा लगी हुई है. सफाई करते हुए प्रतिमा को दूध से नहलाया गया.

यह भी पढ़ें: UP News: सपा पर बरसे मंत्री सूर्य प्रताप शाही, 'योगी सरकार ने किसानों को संकट से निकाला'