उत्तराखंड के बदरीनाथ धाम में चल रहे मास्टर प्लान के कार्य पूरे होने के बाद इस पवित्र नगरी के संरक्षण और रखरखाव के लिए अलग प्राधिकरण गठित किया जाएगा. शासन स्तर पर इस दिशा में मंथन शुरू हो गया है और केदारनाथ की तर्ज पर बदरीनाथ में भी पृथक प्राधिकरण की व्यवस्था लागू करने की तैयारी है. इसका उद्देश्य मास्टर प्लान के तहत विकसित हो रहे ढांचों की बेहतर देखरेख और भविष्य की जरूरतों के अनुसार निर्माण कार्यों को सुव्यवस्थित तरीके से संचालित करना है.
पिछले करीब चार वर्षों से बदरीनाथ में मास्टर प्लान के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्य चल रहे हैं. इनमें बदरीश झील और शेषनेत्र झील का सौंदर्यीकरण प्रमुख है. इन कार्यों के पूरा होने के बाद लोक निर्माण विभाग की पीआईयू इकाई ने इनके रखरखाव की जिम्मेदारी नगर पंचायत बदरीनाथ को सौंपने का प्रस्ताव रखा था. हालांकि, नगर पंचायत ने कार्यों की अधिकता और सीमित संसाधनों का हवाला देते हुए इस जिम्मेदारी को लेने से इंकार कर दिया. इसके बाद यह सवाल खड़ा हुआ कि मास्टर प्लान के कार्य पूर्ण होने के बाद इन परिसंपत्तियों का संचालन और संरक्षण कौन करेगा.
बदरीनाथ के लिए बनेगा अलग प्राधिकरण
इसी पृष्ठभूमि में शासन ने निर्णय लिया है कि मास्टर प्लान पूरा होने के बाद बदरीनाथ के लिए एक अलग प्राधिकरण का गठन किया जाएगा. यह प्राधिकरण केदारनाथ प्राधिकरण की तरह काम करेगा और बदरीनाथ धाम के समग्र सौंदर्यीकरण, रखरखाव और आवश्यकतानुसार नए निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी संभालेगा. इससे धार्मिक नगरी के सुव्यवस्थित विकास के साथ-साथ व्यवस्थाओं को लंबे समय तक सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी.
संरक्षण और रखरखाव का कार्य सौंपा जाएगा
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने भी इस प्रस्ताव की पुष्टि करते हुए बताया कि केदारनाथ की तर्ज पर बदरीनाथ प्राधिकरण के गठन की योजना पर काम चल रहा है. मास्टर प्लान के कार्य संपन्न होने के बाद बदरीनाथ धाम के संरक्षण और रखरखाव का जिम्मा इसी प्राधिकरण को सौंपा जाएगा. इस संबंध में शासन स्तर पर आवश्यक प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं.
वित्तीय पक्ष की बात करें तो बदरीनाथ मास्टर प्लान के लिए कुल 350 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, जिसमें से अब तक करीब 150 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं. वर्तमान में बदरीनाथ में शेषनेत्र और बदरीश झील, लूप रोड तथा अराइवल प्लाजा जैसे प्रमुख कार्य पूरे हो चुके हैं. वहीं अस्पताल भवन, रिवर फ्रंट, दो पुलों का निर्माण, तीर्थ पुरोहितों के लिए आवास और बदरीनाथ मंदिर के 75 मीटर क्षेत्र में सौंदर्यीकरण का कार्य अभी जारी है. मास्टर प्लान पूरा होने के बाद नए प्राधिकरण के जरिए इन सभी परिसंपत्तियों के बेहतर संचालन और संरक्षण की दिशा में एक स्थायी व्यवस्था कायम की जाएगी.