उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में योग गुरु बाबा रामदेव गुरुवार को स्नान के लिए संगम पहुंचे. बाबा रामदेव ने संगम घाट पर पवित्र नदियों का जल का सेवन किया और फिर घाट पर होने वाली आरती में भी भाग लिया. इसी बीच, उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ माघ मेले में हुई बदसलूकी को गलत बताया और कहा कि ऐसा व्यवहार किसी के साथ भी अस्वीकार्य है.

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ माघ मेले में हुई बदसलूकी पर उन्होंने कहा, "यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे अपने योगियों और पूजनीय संतों को भी अपमानजनक या अपशब्दों का सामना करना पड़ता है. ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है, न केवल शंकराचार्य के लिए, बल्कि किसी भी साधु के लिए. किसी के बारे में भी ऐसी टिप्पणी करना निंदनीय और शर्मनाक है. हर आदमी को अपने गौरव और गरिमा का ध्यान खुद रखना चाहिए."

कोई देश का इस्लामीकरण करना चाहता है- बाबा रामदेव

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बाबा रामदेव ने कहा कि शंकराचार्य जी को हम भगवान शंकर का विग्रहमान स्वरूप मानते हैं तो शंकराचार्य जी की तरफ से कोई विवाद न हो ऐसी हम अपेक्षा करते हैं. साधु हैं वो विवाद किस बात का करेगा, कम से कम किसी धर्मस्थान पर तो विवाद नहीं कर सकता है, तीर्थ में किस बात का विवाद. न यहां कोई स्नान का विवाद होना चाहिए, न कोई पालकी का विवाद होना चाहिए. वो साधु क्या जो अहंकार करे, साधु बनता ही वो है जिसने अपने अभिमान को मिटा दिया है. कोई देश का इस्लामीकरण करना चाहता है, कोई ईसाईकरण करना चाहता है कोई गजवा ए हिन्द बनाना चाहता है तो सनातन के शत्रु तो बाहर ही बहुत हैं तो कम से कम हम आपस में न लड़ें. 

उन्होंने आगे कहा कि माघ मेला सिर्फ नाम, जप और तप के लिए है. हमारे यहां कहा गया है कि अहंकार करने वाला शख्स कभी साधु नहीं हो सकता है. तीर्थों में भी कुछ लोग अपना एजेंडा लेकर चलते हैं. मुझे लगता है कि तीर्थ किसी के अहम का, प्रतिष्ठा का एजेंडा नहीं होना चाहिए. ये तीन पवित्र नदियों का स्थान है, मुक्ति का स्थान है.

त्रिवेणी संगम आना ही अपने आप में एक बड़ा आशीर्वाद- बाबा रामदेव

संगम में स्नान के अनुभव पर उन्होंने कहा, "त्रिवेणी संगम में स्नान और दान का विशेष महत्व है. त्रिवेणी संगम आना ही अपने आप में एक बड़ा आशीर्वाद है. संगम घाट पर दिव्य व्यवस्था, पवित्र दर्शन और आध्यात्मिक वातावरण व्याप्त है. हमारा प्रयागराज तीर्थराज है, और इस तीर्थ स्थान के देवव्रत को अपने संयम से, अपने तप से, अपने योग, अपने अध्यात्म से और अपने राज धर्म से निभाते हुए जिस तरीके से सीएम योगी माघ मेले को व्यवस्थित कर रहे हैं, यह हमारी आत्मा को हर्षित करने वाला है."

अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य और पुलिस प्रशासन के बीच हुई थी झड़प

बता दें कि 17 जनवरी को माघ अमावस्या के दिन रथ और पूरे लाव-लश्कर के साथ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पवित्र नदी में स्नान करने पहुंचे थे, जहां पुलिस प्रशासन ने उन्हें बिना रथ के आगे बढ़ने को कहा. इस मामले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य और पुलिस प्रशासन के बीच झड़प तीखी हुई. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनके साथ यह व्यवहार जानबूझकर किया गया है, जिससे उनके मान-सम्मान को ठेस पहुंची है. इस घटना के बाद से ही शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में ही धरने पर बैठे हैं.