समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के 10 ठिकानों पर छापेमारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने पहला बयान जारी किया है.  बयान के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लखनऊ जोनल ऑफिस ने 19.08.2026 को 'प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA), 2002 के तहत रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में 10 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया. यह कार्रवाई रामपुर में मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग बनाने के लिए जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और सरकारी फंड के गलत इस्तेमाल से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की चल रही जांच के सिलसिले में की गई.

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एक बयान में कहा गया कि ED ने PMLA, 2002 के तहत जांच तब शुरू की जब उत्तर प्रदेश पुलिस ने रामपुर जिले के अजीम नगर पुलिस स्टेशन में 26 FIR और रामपुर के कोतवाली पुलिस स्टेशन में एक FIR दर्ज की. इन FIR में IPC के तहत जबरन वसूली, धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे अपराध शामिल थे, जो PMLA के तहत 'शेड्यूल्ड ऑफ़ेंस' (सूचीबद्ध अपराध) माने जाते हैं.

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ED ने क्या-क्या जब्त किया है?

कहा गया कि FIR और कानून लागू करने वाली एजेंसी की जांच के अनुसार, आरोप है कि मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी, रामपुर ने अपने चांसलर मो. आजम खान और अन्य लोगों के जरिए किसानों की जमीन और भारत सरकार की 'एनिमी प्रॉपर्टी' (शत्रु संपत्ति) को अवैध रूप से हासिल किया.

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बयान के अनुसार ED 'प्रोसीड्स ऑफ़ क्राइम' (अपराध से हुई कमाई) के बनने, छिपाने, कब्जे, अधिग्रहण और इस्तेमाल से जुड़ी पूरी मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन का ब्योरा) की जांच कर रही है, जिसमें यूनिवर्सिटी के लिए बनाई गई संपत्तियां भी शामिल हैं. तलाशी अभियान के दौरान, PMLA, 2002 के प्रावधानों के तहत आपत्तिजनक दस्तावेज, ट्रस्ट को मिले कथित फ़र्जी दान से जुड़े रिकॉर्ड और जांच से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए.