अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. एबीपी न्यूज़ ने इन तमाम विवादों के बीचश्री राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा से बात की. उन्होंने तमाम सवालों का खुलकर जवाब दिया. नृपेंद्र मिश्रा ने माना जा कि चढ़ावे की काउंटिंग के दौरान गड़बड़ी हुई है. पूरी प्रक्रिया ऐसी थी जहां निगरानी शून्य थी. यहीं नहीं मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या और चढ़ावा राशि में भी काफी विरोधाभास पर भी उन्होंने जवाब दिया है. 

Continues below advertisement

चढ़ावा चोरी मामले की जांच के दौरान मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और दान राशि को लेकर कई तरह के विरोधाभास देखने को मिल रहे हैं. जिस पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल हो रहा है. जानकारी के मुताबिक मार्च 2025 से फरवरी 2026 तक क़रीब 11 महीनों में राम मंदिर में 83 करोड़ रुपये दान में आए लेकिन, इस दौरान 16 करोड़ श्रद्धालु दर्शन के लिए आए. यानी इस हिसाब से श्रद्धालु 5 रुपये ही दान पेटी में डाल रहे हैं. 

16 करोड़ श्रद्धालु और चढ़ावा सिर्फ 83 करोड़?

एबीपी न्यूज़ की वरिष्ठ पॉलिटिकल एडिटर मेघा प्रसाद ने जब इस आंकड़े पर सवाल किया तो नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि सबसे पहले तो हमें ये देखना होगा कि 16 करोड़ श्रद्धालु मंदिर आए या नहीं और ये बहुत मुश्किल काम नहीं है. क्योंकि प्रतिदिन इसका रिकॉर्ड आता है. कमिश्नर के पास भी आता है. तो मैं भी आश्वस्त होना चाहूंगा कि वास्तव में औसतन 5 रुपये दिए जा रहे हैं. 

Continues below advertisement

ट्रस्ट को ये बताना चाहिए कि मार्च 2025 से मार्च 2026 तक कितने श्रद्धालु आए. मुझे लगता है कि कहीं न कहीं पचास रुपये या सौ रुपये तो होने चाहिए. इसलिए इस 16 करोड़ के आंकड़े की वास्तविकता जानना जरूरी है. नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि अगर एसआईटी उनसे कुछ भी सवाल करना चाहेगी तो मैं जरूर जाऊंगा और जो जानकारी होगी वो बताऊंगा. 

राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर सीएम योगी के बयान के बाद भड़की सपा, बृजभूषण शरण सिंह का नाम लेकर किया बड़ा दावा

काउंटिंग में निगरानी शून्यता रही

नृपेंद्र मिश्रा ने इस दौरान ये बात मानी कि चढ़ावे की काउंटिंग के समय कुछ ऐसे साक्ष्य बताए जा रहे हैं, जिससे ये संकेत मिल रहा है कि पूरी प्रक्रिया ऐसी थी जहां निगरानी नाम की शून्यता थी. बैंक और ट्रस्ट में जो एग्रीमेंट था उसमें साफ था कि काउंटिंग के लिए बैंक जिम्मेदार है. उसको हिसाब रखना था. बैंक ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई है. काउंटिंग रूम में बैंक को अपने आदमी रखने चाहिए थे. 

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सीएम योगी द्वारा उनसे दूरी बनाए जाने पर नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि ये सीएम का उच्चतम विवेक का उदाहरण है. जो लोग एसआईटी के समक्ष जाएं, जांच हो या बयान लिया जाए, वो सीएम के साथ दिखे ये नहीं होना चाहिए. आम लोग ये ना कहें कि क्या एसआईटी जांच करेगी जब वो योगी जी के साथ हैं. 

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: अयोध्या में सीएम योगी ने लिया अखिलेश का नाम, फिर बोले- वो अपने विधायक को...