Ayodhya News: मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की जन्म स्थली पर भगवान रामलला का दिव्य भव्य मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है. मंदिर निर्माण कार्य में गर्भ ग्रह का कार्य शुरू हो गया है. राम मंदिर का निर्माण कार्य 60% पूरा हो गया है. महज 1 साल बचा हुआ है जब भगवान राम लला अपने दिव्य भव्य मंदिर में विराजमान होंगे. 2023 के दिसंबर माह में राम मंदिर का प्रथम तल बन करके तैयार हो जाएगा.

भगवान रामलला सूर्यवंशी होने के नाते भगवान रामलला का मंदिर इस तरह बनाया जा रहा है कि रामनवमी के दिन भगवान रामलला के ललाट पर दोपहर 12 बजे सूर्य की किरण प्रकाशित होगी. इस तरह से मंदिर का निर्माण कार्य कराया जा रहा है. इसके लिए वैज्ञानिकों की टीम लगाई गई है और इस तरह से मंदिर का निर्माण कार्य कराया जा रहा है कि रामनवमी के दिन जब भगवान रामलला के ललाट पर सूर्य की किरण प्रकाशित करेगी. उसी समय से रामलला के मंदिर में रामनवमी का भव्य जन्मोत्सव मनाया जाएगा और इस बार रामनवमी के मौके पर लाखों श्रद्धालु भगवान राम का जन्मोत्सव मनाएंगे.

हर महीने में की जाती है बैठक बता दें कि 9 नवंबर 2019 को राम मंदिर के पक्ष में फैसला आया और 5 अगस्त 2020 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हाथों से भूमि पूजन किया. भूमि पूजन के बाद से ही मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है. मंदिर निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट दिन रात मजदूर लगाकर मंदिर का निर्माण कार्य करवा रहे हैं. यही वजह है कि राम मंदिर निर्माण कार्य को जल्द से जल्द कैसे पूरा किया जा सके. इसके लिए हर महीने भवन निर्माण समिति की बैठक की जाती है और यह बैठक भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में की जाती है.

इस कल्पना को किया जाएगा साकार राम मंदिर को इस तरह बनाया जा रहा है कि भविष्य में कभी भी भूकंप आए तो राम मंदिर को किसी भी तरह का कोई भी नुकसान ना पहुंचा सके. इसके लिए वैज्ञानिक और विशेषज्ञों की टीम लगाई गई है, जिससे राम मंदिर को किसी भी तरह का कोई नुकसान ना हो और हजारों सालों तक राम मंदिर इसी तरह बना रहे. इस तरह से मंदिर का निर्माण कार्य किया जा रहा है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्ट सदस्य कामेश्वर चौपाल ने कहा कि भगवान राम सूर्यवंशी है, तो उनके जन्मदिन पर सूर्य की रोशनी भगवान राम के ऊपर सीधे पड़े. यह एक कल्पना हम लोगों ने की है. कोई असंभव चीज आज के दिन में नहीं है, आज से पहले भी हमारे देश में ऐसे मंदिर थे, जैसे कोणार्क का सूर्य मंदिर है, दिल्ली के जंतर मंतर है. कई राजाओं के खगोल शास्त्र के चिन्ह आज भी विद्यमान है जो वो सारे संभव है तो यह भी संभव है.

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