Ayodhya News: अयोध्या (Ayodhya) में तीन ऐतिहासिक परिक्रमा की जाती है जिसमें से 14 कोसी पूरे अयोध्या क्षेत्र में की जाती है और 5 कोस की परिक्रमा राम जन्मभूमि की परिधि में की जाती है. चौरासी कोस की परिक्रमा आज से शुरुआत की गई है जो कि 23 दिनों तक चलेगी, यह परिक्रमा अलग-अलग जिलों से होकर गुजरती है. इस परिक्रमा की शुरुआत 2013 में विश्व हिंदू परिषद ने शुरू की थी और उसी साल अखिलेश यादव की सरकार ने चौरासी कोस की परिक्रमा पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन फिर 2014 में चौरासी कोस परिक्रमा की शुरुआत हुई, अब वह परिक्रमा निरंतर चली आ रही है.

यह परिक्रमा अयोध्या के समस्त साधु संत करते हैं और अलग-अलग पड़ाव पर परिक्रमा का भव्य स्वागत होता है. यह परिक्रमा अयोध्या के कारसेवकपुरम से शुरुआत की गई है. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने हरी झंडी दिखाकर परिक्रमा को रवाना किया यह परिक्रमा निरंतर 23 दिनों तक चलेगी. तो वहीं 84 कोसी परिक्रमा के आयोजक सुरेंद्र सिंह ने बताया कि यह चौरासी कोस की परिक्रमा अयोध्या से मखोड़ा होते हुए बस्ती, अयोध्या, बाराबंकी, गोंडा, सूर्य कुंड सीता कुंड बाराही देवी अलग-अलग धार्मिक स्थलों से होकर के 23 दिनों तक चलेगी. यह परिक्रमा अनादिकाल से चलती चली आ रही है. 

2013 में शुरू की गई थी परिक्रमा इस परिक्रमा की शुरुआत विश्व हिंदू परिषद ने 2013 में संकल्प के साथ शुरू किया था और उसी साल अखिलेश यादव की सरकार ने चौरासी कोस की परिक्रमा पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन 2014 से फिर चौरासी कोस परिक्रमा की शुरुआत हुई और यह परिक्रमा निरंतर चली आ रही है. इस परिक्रमा में सरकार से मांग की गई है कि 84 कोसी परिक्रमा पथ को ठीक तरह से बनाएं और जो 2 नदी को पार करना पड़ता है, उस नदी पर पुल बनाएं जिससे कि सुगमता से परिक्रमा को किया जा सके, जब पुल बन जाएगा हमारी यात्रा में चार चांद लग जाएगा, तब लाखों लोग इस चौरासी कोस की परिक्रमा को करेंगे.

चौरासी कोसी परिक्रमा आयोजक सुरेंद्र सिंह ने बताया कि अयोध्या से मखोड़ा होते हुए और बस्ती के तीन पड़ाव के बाद बाराबंकी, गोंडा से होते हुए परिक्रमा आगे बढ़ती है, यह परिक्रमा 23 दिनों तक चलेगी, यह परिक्रमा अनादिकाल से चल रही है, विश्व हिंदू परिषद ने जब सन 2013 से परिक्रमा का संकल्प लिया और उसी साल अखिलेश यादव की सरकार ने प्रतिबंध लगाया, जब 2014 से हम लोगों ने परिक्रमा शुरू की, तब सरकार से एक चीज की मांग की कि रास्ता बनाओ, पुल बनाओ. उस कार्य को सरकार ने मांन किया, अब वह सड़क बनाएंगे और जब पुल बन जाएंगे, तब हमारी यात्रा में चार चांद लग जाएंगे लाखों लाख लोग परिक्रमा करेंगे. 

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