UP Assembly Election 2022: औरैया (Auraiya) जिले को इटावा जिले से अलग कर 1997 में बनाया गया था. वैसे तो यह जिला सपा बसपा का गढ़ ही माना जाता है लेकिन साल 2017 में औरैया जिले की तीनों विधानसभा सीट पर बीजेपी ने जीत की स्याही लगाई. औरैया सदर विधानसभा (Auraiya Sadar assembly) की बात की जाए तो यह सीट सुरक्षित सीट है. इससे पहले 2012 में इस सीट को अजीतमल विधानसभा से हटाकर औरैया सदर विधानसभा किया गया और परिसीमन के आधार पर यह सीट सुरक्षित हुई. वैसे तो इस विधानसभा में दलित वोट ज्यादा है लेकिन इसपर हार जीत का फैसला भी ब्राह्मण वोट ही तय करते हैं.
कब किसकी हुई जीतऔरैया जिले के औरैया सदर विधानसभा क्षेत्र की बात की जाए तो इस क्षेत्र का विकास किसी सरकार की तरफ से नहीं कराया गया. साल 2012 में सपा ने जीत हासिल की और यहां से विधायक बने मदन गौतम लेकिन विकास के नाम पर झूठे वायदे ही मिले. मोदी लहर में 2017 में सपा को हार का मुंह देखना पड़ा. यहां से बीजेपी ने बाजी मारी. वर्तमान में यहां से बीजेपी के रमेश दिवाकर विधायक बने जिनकी कोरोना काल में कोरोना से मौत हो गई.
2017 में किसे कितने वोट मिले2017 के विधानसभा चुनाव में औरैया विधानसभा सीट पर बीजेपी को बड़ी जीत हासिल हुई. इस सीट पर साल 2017 में कुल मतदाताओं की संख्या 3,19,346 थी. इसमें से 1,84,820 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था. बीजेपी उम्मीदवार रमेश चंद्रा को 83,850 वोट मिले थे. इस सीट पर बीजेपी को बसपा के भीमराव अंबेडकर से टक्कर मिली थी. बसपा प्रत्याशी भीमराव अंबेडकर को 51,718 और सपा के पूर्व विधायक मदन गौतम को 39,201 वोट मिले थे.
किसके वोट का है खास महत्वऔरैया जिले में दलित वोटों की अगर बात की जाए तो लगभग 76,175 हैं जिसके बाद ब्राह्मण वोट 36,654 हैं जो हर बार औरैया विधानसभा में किसी भी प्रत्याशी को जिताने के लिए अहम भूमिका रखता है. औरैया जिले के लोगों का भी कहना है कि यह बात सही है कि ब्राह्मण वोट जिस तरफ झुकता है जीत उसकी होती है. हालकि कुछ दिन पहले एक बीजेपी नेता एक जाति विशेष को लेकर गाली देने का वीडियो वायरल हुआ था जिसके बाद औरैया जिले के आस पास के ब्राह्मणों ने एकत्र होकर आरोपी नेता पर कार्रवाई न होते देख कोतवाली का घेराव किया था. बाद में माहौल बिगड़ता देख पुलिस की तरफ से आरोपी बीजेपी नेता को गिरफ्तार किया गया.
इसबार है कांटे की टक्करभारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष श्री राम मिश्रा का कहना है कि ब्राह्मण वोट की संख्या सबसे अधिक है तो उनकी बड़ी भूमिका है लेकिन भारतीय जनता पार्टी सर्वजन की पार्टी है. सबको साथ लेने वाली पार्टी है. फिलहाल इस बार चुनाव का माहौल अलग ही देखने को मिल रहा है. कांटे की टक्कर दिख रही है. इस जिले से जहां सपा बसपा ने 2012 तक अपना कब्जा बनाए रखा लेकिन 2017 में बीजेपी ने इतिहास बना दिया. बीजेपी ने एकसाथ तीनों विधानसभा पर अपनी जीत का परचम लहराया.
ये भी पढ़ें:
