औरैया: दसवीं शताब्दी का अभिशापित नाग मंदिर, छत डालने वाले की मौत तय,151 मंदिर-151 कुंओं का रहस्य
Auraiya News:यह मंदिर 1018-19 ईस्वी सदी की घटनाओं से जुड़ा है, जब महमूद गजनवी ने भारत में इस्लाम फैलाने के लिए कन्नौज से मथुरा तक आक्रमण कर मंदिरों की तोड़-फोड़ करवाई थी.

देश के अलग-अलग इलाकों में स्थित कई मंदिरों की हैरतअंगेज कहानियां हैं, लेकिन कुछ कहानिया सुनकर ही रूह कांप जाए. जी हां कुछ ऐसी ही कहानी यूपी के औरैया स्थित नाग मंदिर की है. इस नाग मंदिर की विशेषता ये है कि इसके ऊपर छत नहीं है और जिसने भी छत डालने की कोशिश की उसकी मौत हो जाती है. आज नागपंचमी के दिया यहां दूर-दराज से पूजा करने पहुंचते हैं.
औरैया जिले से 40 किलोमीटर दूर सेहुद गांव में स्थित धौरा नाग मंदिर की एक अलग ही दास्तान है, जो अनेकों मान्यताओं और रहस्यों से भरा हुआ है. इस गांव में 151 मंदिर और 151 कुंए हैं, लेकिन धौरा नाग मंदिर की कहानी सबसे ज्यादा रोमांचित करती है..
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और अभिशाप की मान्यता
यह मंदिर 1018-19 ईस्वी सदी की घटनाओं से जुड़ा है, जब महमूद गजनवी ने भारत में इस्लाम फैलाने के लिए कन्नौज से मथुरा तक आक्रमण कर मंदिरों की तोड़-फोड़ करवाई थी. औरैया के सेहुद गांव का प्राचीन धौरा नाग मंदिर की खंडित मूर्तियां इसी बात का प्रमाण हैं. आज भी इस मंदिर की हालत जस की तस बनी हुई है, और स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मंदिर अभिशापित है.
ग्रामीणों का मानना है कि जो भी इस मंदिर का निर्माण कराने की कोशिश करता है या यहां की खंडित मूर्तियां अपने साथ ले जाने की कोशिश करता है, उसकी या उसके परिवार में किसी की असमय मृत्यु हो जाती है, या उसका जीवन परेशानियों से भर जाता है. एक उदाहरण के रूप में लखनऊ में इंजीनियर कमलकिशोर ने मंदिर की छत डलवाने की कोशिश की, लेकिन उनके दो पुत्रों की असमय मृत्यु हो गई. ग्रामीणों का कहना है कि छत तो दूर की बात है, यहां तक कि मंदिर की कोई भी चीज, जैसे ईंट या खंडित मूर्ति, यदि कोई व्यक्ति अपने साथ ले जाने का प्रयत्न करता है, तो उसे मजबूर होकर इन मूर्तियों को वापस रखने आना पड़ता है.
मंदिर से जुड़ी अन्य मान्यता
इस मंदिर से जुड़ी अन्य मान्यताओं में यह भी शामिल है कि गांव की लड़कियों की शादी कहीं भी, कितनी भी दूर क्यों न हो जाए, उन्हें इस मंदिर में हर हाल में एक बार आना ही पड़ता है. नांगपंचमी के दिन ही इस मंदिर की साफ-सफाई की जाती है, और इससे पूर्व और बाद में सिर्फ पूजा होती है. इन तमाम कहानियों का केंद्र बना यह मंदिर आज भी बिना छत और खंडित मूर्तियों के साथ लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है.
शासन-प्रशासन और स्थानीय लोगों की भूमिका
कई लोग सोच सकते हैं कि ऐसा इसलिए है क्योंकि शासन-प्रशासन या स्थानीय लोगों ने इस मंदिर के निर्माण में रुचि नहीं ली होगी, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है. मंदिर की अभिशापित मान्यता के कारण ही कोई भी इसकी मरम्मत या निर्माण कार्य में हिम्मत नहीं जुटा पाता.
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Source: IOCL

























