उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के वंदे मातरम् और मुसलमानों को लेकर दिए गए बयान पर पलटवार किया है. मदनी ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की वर्किंग कमेटी की दो दिवसीय बैठक के बाद जारी डिक्लेरेशन में कहा था कि मुसलमान कभी झुके नहीं हैं और न कभी झुकेंगे. उन्होंने वंदे मातरम् को अनिवार्य किए जाने का विरोध करते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताया था और कहा था कि उनका संगठन इस मुद्दे पर अदालत का दरवाजा खटखटाएगा.

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इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए यूपी सरकार के मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने कहा कि उनके ही धर्म के कुछ लोग ऐसे बयान देकर मुस्लिम समाज को गुमराह करने का काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि आज जरूरत मुस्लिम समाज के विकास, रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास जैसे मुद्दों पर बात करने की है, लेकिन कुछ लोग समाज को भटकाने वाले बयान देने में लगे हैं.

दानिश आज़ाद अंसारी ने कहा, 'जो लोग वंदे मातरम् का विरोध कर रहे हैं, उन्होंने उसके अर्थ को समझा ही नहीं है. अगर समझा होता तो इस तरह की बातें नहीं करते. लेकिन अरशद मदनी जैसे कुछ लोग अर्थ समझते हुए भी समाज को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं.' उन्होंने कहा कि देश में मुस्लिम समाज को आगे बढ़ाने, युवाओं को रोजगार और बेहतर शिक्षा दिलाने की जरूरत है, लेकिन कुछ संगठन लगातार ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं जिनसे समाज में भ्रम पैदा होता है.

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मदनी ने क्या कहा था?

दरअसल, जमीयत उलेमा-ए-हिंद की बैठक के बाद जारी डिक्लेरेशन में देश के मौजूदा सांप्रदायिक माहौल, नफरत की राजनीति और धार्मिक कट्टरता पर चिंता जताई गई थी. संगठन ने आरोप लगाया था कि देश में नफरत की राजनीति अब 'डराने की राजनीति' में बदल गई है और मुसलमानों को भयभीत कर थोपी गई शर्तों पर जीने के लिए मजबूर करने की कोशिश की जा रही है.

जमीयत ने समान नागरिक संहिता (UCC), वंदे मातरम् को अनिवार्य किए जाने, मस्जिदों-मदरसों पर कार्रवाई और कथित तौर पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ माहौल बनाए जाने का भी विरोध किया था.

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मौलाना मदनी ने यह भी आरोप लगाया था कि देश को योजनाबद्ध तरीके से एक वैचारिक राष्ट्र में बदलने की कोशिश हो रही है और संवैधानिक संस्थाओं की निष्क्रियता के कारण ऐसे प्रयास सफल होते जा रहे हैं. उन्होंने कहा था कि कई राज्यों में UCC लागू की जा चुकी है और असम में भी इसकी तैयारी चल रही है. साथ ही उन्होंने मस्जिदों, मकबरों और मदरसों पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए थे. जमीयत ने साफ कहा था कि इन सभी मुद्दों पर कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रहेगी.