उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कुछ राजनीतिक दल संगठनात्मक बदलाव कर रहे हैं. इनका उद्देश्य प्रेदश में जातिगत समीकरण को साधना और स्थिति को मजबूत करना है. अब इसी दिशा में कांग्रेस भी पार्टी और संगठन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा बदलाव कर सकती है. खबरें हैं कि पार्टी अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए प्रेदश अध्यक्ष पद से अजय राय को हटाकर अराधना मिश्रा मोना को नियुक्त कर सकती है. पार्टी ने अजय राय  को किनारे नहीं किया है बल्कि खबरें हैं कि उन्हें केंद्रीय स्तर पर कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. 

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वैसे तो कांग्रेस हर 2-3 सालों में प्रदेश में संगठनात्मक बदलाव करती है और उसी को आगे बढ़ाते हुए पार्टी में दोबारा बदलाव के संकेत मिल रहे हैं. मिश्रा के अलावा पार्टी की योजना एक OBC तथा एक मुस्लिम नेता को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की भी चर्चा है. अगर ये अटकलें भी सही साबित होती हैं तो साफ है कि कांग्रेस  ब्राह्मण, OBC वोट को साधने के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय को भी साथ लेकर चलने की योजना बना रही है. पहले ही पार्टी ने जून 2026 में दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम बतौर प्रदेश प्रभारी बनाया है, जिसका उद्देश्य दलित वर्ग को साधना है.

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कौन हैं मोना मिश्रा?

यहां सबसे अधिक चर्चा है उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधानमंडल दल (CLP) की नेता और रामपुर खास से विधायक मोना मिश्रा की, जिन्हें कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बना सकती है. तीन बार विधायक रह चुकीं आराधना उत्तर प्रदेश की राजनीति को अच्छी तरह समझती हैं और उनके परिवार का भी राजनीति से गहरा नाता रहा है. या यूं कहें कि अपने पिता प्रमोद तिवारी की राजनीतिक विरासत को वो रामपुर खास में आगे बढ़ा रही हैं.

उनके पिता नौ बार रामपुर खास का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. मोना मिश्रा ने सबसे पहले साल 2014 के उपचुनाव में रामपुर खास से जीत दर्ज की थी. इसके बाद वो साल 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में यहां से जीत दर्ज कर चुकी हैं. 

बता दें कि मोना का जन्म 20 अप्रैल 1974 को प्रयागराज में हुआ था और उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से 1997 में कॉमर्स से ग्रेजुएशन के बाद बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर की डिग्री प्राप्त की है. साल 1999 में अंबिका मिश्रा से उनकी शादी हुई थी और उनके दो बच्चे भी हैं.

मोना मिश्रा ही क्यों?

यूपी की राजनीति में ब्राह्मण वोटरों की हिस्सेदारी 10 स 12 प्रतिशत है और राज्य की 403 विधानसभा सीटों पर इनका प्रभाव काफी मजबूत माना जाता है. कभी ये वोटर कांग्रेस का मजबूत आधार हुआ करता था, लेकिन समय के साथ इनका झुकाव बीजेपी की तरफ अधिक होता गया. अब कांग्रेस मोना मिश्रा के जरिए अपने कोर वोटर को फिर से साधने का प्रयास करते हुए दिखाई दे रही है. इसके अलावा एक और बड़ा कारण मोना मिश्रा के जरिए पार्टी प्रदेश की महिला वोटरों को भी साधने का प्रयास करेगी. प्रदेश में महिला वोटरों की संख्या करीब 47% है और ये सरकार बनाने में बड़ी निर्णायक साबित हो सकती हैं. 

कांग्रेस की वास्तविक रणनीति क्या है?

इसके अलावा जिस तरह से पार्टी इस बार प्रदेश के बड़े वोटरों को साधने के लिए काम कर रही है उसे देखकर साफ है कि इस बार कांग्रेस की रणनीति ब्राह्मण, दलित, ओबीसी और मुस्लिम वर्ग के समीकरण को साधने की है. आंकड़ों को देखें तो प्रदेश में OBC वर्ग  40-45%, दलित 20-21% और मुस्लिम समुदाय करीब 19-20% प्रतिशत है. कांग्रेस ने पहले ही दलित चेहरे और दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को बतौर प्रदेश प्रभारी बनाया था. इस कदम को दलित और पिछड़े वर्ग को साधने के तौर पर देखा जा रहा था.

अब मोना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की योजना है. इसके अलावा  OBC और मुस्लिम चेहरों को कार्यकारी अध्यक्ष बनाये जाने की भी खबर है. ऐस लगता है कि पार्टी एक ही जाति को साधने की बजाय कई सामाजिक समूहों को शीर्ष संगठन में प्रतिनिधित्व देकर बराबरी का समीकरण बनाने में जुटी हुई है. अब ये समीकरण कितने सफल होते हैं 2027 के चुनावों के बाद ही साफ हो सकेगा. 

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