दिल्ली में नीट परीक्षा को लेकर छात्रों के आंदोलन पर हुए लाठीचार्ज पर उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने विपक्षी दलों पर इस आंदोलन को और आक्रोशित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि अगर उस दिन बच्चे घायल हुए तो कई पुलिसवाले भी घायल हुए हैं. उन्हें भी चोटें आई हैं. उन्होंने इस प्रदर्शन के पीछे अंडर करंट को लेकर भी सवाल उठाए. 

Continues below advertisement

अपर्णा यादव ने छात्रों के आंदोलन और विरोधी दलों के खुलकर समर्थन पर कहा कि "ये सब विपक्ष के सम्मानित नेता है, इस प्रकार जहां बच्चे और युवा थे जो इतने आक्रोशित थे, ऐसे समय पर उन्हें और आक्रोशित करना, उन्हें फ्यूल करना इसकी आवश्यकता नहीं थी. मुझे लगता है कि जिस प्रकार से प्रशासन ने वहां पर कंट्रोल करने की कोशिश की वो बहुत अनिवार्य भी था."

UP Weather: यूपी में सक्रिय रहेगा मानसून, आज आगरा से वाराणसी तक बारिश का अलर्ट, जानें मौसम का अपडेट 

Continues below advertisement

'बच्चों के साथ पुलिसवालों को लगी चोटें'

उन्होंने कहा कि इस दौरान पुलिस के लोगों को भी बहुत चोटें लगी हैं. ऐसा नहीं है कि सिर्फ बच्चे ही उसमें घायल हुए हैं, पत्थरबाजी में बच्चों के साथ पुलिस को भी चोट आई हैं. मुझे लगता है कि वो भी इंसान हैं, जहां तक नीट की बात है तो अभी तो नतीजे आएं हैं उनमें कई ऐसे बच्चों ने भी क्वालिफ़ाई किया है जो सब्जी वालों के बच्चे हैं. ऐसे बच्चे जिनकी मां ईंट के भट्टों पर काम करती थी उनकी बेटियों ने नीट क्वालिफाई किया है.

अपर्णा ने कहा कि जो पढ़ने वाले बच्चे थे उन्होंने पूरी मेहनत और शिद्दत से नीट परीक्षा पास की है. लेकिन ये बच्चे जो प्रदर्शन में हैं, वो कहां से हैं, इसके पीछे क्या अंडर करंट है ये आप लोगों के माध्यम से हमें पता चलेगा. भारत में जो अराजकता फैलाने की कोशिश करेंगे उनको यथाउचित उसी प्रकार व्यवहार किया जाएगा.

दिल्ली में छात्रों का आंदोलन जारी

बता दें दिल्ली में नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का धरना प्रदर्शन आज भी जंतर-मंतर पर जारी है. वहीं दूसरी तरफ़ मेदांता अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने भी अपनी भूख हड़ताल अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दी है. उन्होंने सरकार से माँग की है प्रदर्शन में आए बच्चों पर कार्रवाई न की जाए. 

'शरियत के खिलाफ थोपे कानून को नहीं..', यूसीसी कानून को लेकर भड़के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी