लखनऊ, शैलेश अरोड़ा। मानदेय घटने के विरोध में सूबे के अनुदेशक सड़कों पर उतर आए हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों का कहना है कि एक तरफ तो भिखारियों को 8 से 10 हजार मानदेय देने की तैयारी है, और दूसरी तरफ उच्च डिग्री धारी अनुदेशकों का मानदेय घटाकर 7 हजार कर दिया गया। इतना ही नहीं उनसे जबरन रिकवरी तक की जा रही है।
सैंकड़ों अनुदेशकों ने बेसिक शिक्षा निदेशालय पर जमकर प्रदर्शन किया। प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में करीब 31 हजार अनुदेशक कार्यरत है। सपा सरकार ने 2013 में इन अनुदेशकों का मानदेय 7 हजार से बढ़ाकर 8470 रुपए महीना किया था। 2017-18 में केंद्र सरकार ने इनका मानदेय बढ़ाकर 17 हजार स्वीकृत किया। लेकिन प्रदेश सरकार ने मानदेय नहीं बढ़ाया और 8470 रुपये ही मिलते रहे।
लगातार अनुदेशक मानदेय बढ़ाने की मांग लेकर प्रदर्शन भी करते रहे। लेकिन अब प्रदेश सरकार ने मानदेय बढ़ाने की जगह घटा दिया है। इतना ही नहीं इसके बाद अनुदेशकों से 1470 रुपये महीने के हिसाब से 10 महीने की रिकवरी भी की गई है। अनुदेशकों का कहना है कि उनके मामले में हाई कोर्ट तक पक्ष में फैसला दे चुकी है लेकिन सरकार मानने को तैयार नहीं। अनुदेशक 17 हजार रुपये मानदेय की मांग कर रहे हैं।
