अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड शासन ने बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने मामले की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार को सीबीआई जांच की सिफारिश करते हुए औपचारिक पत्र भेजा है. यह पत्र गृह सचिव शैलेश बागैली द्वारा केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को प्रेषित किया गया है.

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पत्र में कहा गया है कि अंकिता भंडारी प्रकरण लंबे समय से सार्वजनिक चर्चा में बना हुआ है और इसे लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में न्यायिक प्रक्रिया पर आमजन का भरोसा बनाए रखने के लिए स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से जांच आवश्यक प्रतीत होती है. शासन का मानना है कि सीबीआई जांच से सभी पहलुओं की निष्पक्ष समीक्षा संभव हो सकेगी.

तीन को आजीवन कारावास की सजा हो चुकी

गौरतलब है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में निचली अदालत ने तीनों आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. घटना के बाद राज्य सरकार द्वारा विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया था, जिसने विस्तृत जांच कर आरोपितों की गिरफ्तारी और चार्जशीट दाखिल की थी. वर्तमान में यह मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है.

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ऑडियो वायरल होने के बाद मामला आया चर्चा में

हाल के दिनों में सोशल मीडिया और इंटरनेट मीडिया पर प्रकरण से जुड़े कुछ ऑडियो-वीडियो वायरल होने के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया. इन्हीं परिस्थितियों के बीच अंकिता के माता-पिता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर मामले की सीबीआई जांच की मांग रखी थी. परिवार का कहना था कि वे मामले में पूरी पारदर्शिता चाहते हैं, ताकि किसी भी तरह की शंका या भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके.

शासन द्वारा केंद्र को भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि इंटरनेट मीडिया पर लगातार तरह-तरह की खबरें और आरोप सामने आ रहे हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बन रही है. ऐसे में मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच आवश्यक है, ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके और जनता का विश्वास कायम रह सके.

सीबीआई जांच को शीघ्र स्वीकृति की मांग

गृह सचिव ने केंद्र से अनुरोध किया है कि एफआईआर के आधार पर सीबीआई जांच को शीघ्र स्वीकृति दी जाए, जिससे प्रकरण के सभी पहलुओं की गहन और निष्पक्ष जांच संभव हो सके. राज्य सरकार का कहना है कि वह पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और जांच एजेंसियों को हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा.