कथावाचाक अनिरुद्धाचार्य का एक और नया वीडियो आया है, जिसमें वो बच्चों को 'ए फॉर एप्पल' पढ़ाए जाने को गलत बता रहे हैं. वीडियो में कथावाचक अनिरुद्धाचार्य कहते दिख रहे हैं कि ए फॉर एप्पल रॉन्ग यानी गलत होता है, बल्कि अमरूद कहना ठीक रहेगा. 

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अनिरुद्धाचार्य ने इसका तर्क भी दिया है. उनका कहना है, "हम लोगों को पढ़ाया गया है कि A for Apple होता है, लेकिन यह तो अमेरिका का विदेशी फल है. सच्चाई यह है कि ए फॉर अमरूद होना चाहिए. जैसे अमेरिका में एप्पल सड़कों के किनारे उगे हुए मिल जाते हैं. भारत में ऐसे ही अमरूद कहीं भी उगया जा सकता है. इसलिए हम एप्पल क्यों पढ़ें? अमरूद क्यों नहीं पढ़ सकते? अमरूद भारतीय फल है, लगभग हर घर में होता है."

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'पढ़ाई में बदलाव की जरूरत'- अनिरुद्धाचार्य

अनिरुद्धाचार्य का कहना है कि पढ़ाई में अब संशोधन कर लेना चाहिए, थोड़ा सा बदलाव जरूरी है. जब ए फॉर अमरूद पढ़ेंगे तो दुनिया अमरूद खाना चाहेगी. अभी ए फॉर एप्पल पढ़ते हैं तो लोग एप्पल खाना चाहते हैं. इससे विदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, वहां का किसान मजबूत होता है. जब हम अमरूद पढ़ेंगे तो भारत की अर्थव्यवस्था और किसानों को मजबूती मिलेगी. इससे दुनिया तक अमरूद पहुंचेगा.

उन्होंने कहा कि यदि हम भारत को विकसित करना चाहते हैं और अपने देश को आगे बढ़ता देखना चाहते हैं तो एप्पल को हटाकर ए फॉर अमरूद रखना होगा. आज हजारों किलो एप्पल अमेरिका से भारत सप्लाई होता है, क्योंकि हमने ए फॉर एप्पल पढ़ा. अगर अमरूद पढ़ा होता तो हमारा अमरूद खाने का मन होता. भारत का किसान अमरूद लगा रहा होता तो भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही होती. इसलिए भारत से अमरूद अमेरिका आए, यह अच्छा है. जो गुण अमरूद में है, वो सेब में नहीं है. दोनों फल अपनी अपनी जगह अच्छे हो सकते हैं लेकिन अमरूद बेहतर है. इसलिए हमें ए फॉर अमरूद ही पढ़ना चाहिए.

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