उत्तर प्रदेश के अमेठी जनपद के स्वास्थ्य विभाग ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिसे हर कोई सोचने पर मजबूर हो जाएगा. पिंडोरिया गांव के रहने वाले रामऔतार को दाहिनी आंखों से कुछ भी नहीं दिखता है. जबकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा उनकी बाई आंख को खराब दिखाते हुए उसका दिव्यांग सर्टिफिकेट भी जारी किया गया है. सबसे बड़ी बात तो यह है कि यह सर्टिफिकेट ऑनलाइन जारी हुआ है.
यह प्रमाण पत्र कोई नया नहीं है अपितु यह 3 साल पुराना है. लेकिन उस अनपढ़ व्यक्ति को यह नहीं पता था कि स्वास्थ्य विभाग ने उसके साथ ब्लेंडर कर दिया है. इस मामले में अधिकारियों ने कार्रवाई की बात कही है.
यह भी पढ़ें: लखनऊ: LDA की संपत्ति खरीदना होगा आसान, रजिस्ट्रेशन फीस के लिए भी मिलेगा लोन
11 अप्रैल 2023 को बना था दिव्यांग प्रमाण पत्र
11 अप्रैल 2023 को बनाया गया यह दिव्यांग प्रमाण पत्र प्राप्त करने के पश्चात गरीब और अनपढ़ रामऔतार अपने प्रमाण पत्र को सुरक्षित सहेजकर घर के बक्से में बंद करके रख दिया. इस भोले भाले आदमी को यह भी नहीं पता था कि दिव्यांग व्यक्ति को सरकार की ओर से तमाम तरह की सुविधाएं भी मिलती हैं. 3 साल बाद जब किसी ने उससे कहा कि तुम्हें एक आंख से पूरा नहीं दिखाई पड़ता है और दूसरे आंख से भी तुम्हें कम दिखाई पड़ता है और तुम दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवा लो तो उससे तुम्हारा काम चल जाएगा. तुमको पेंशन भी मिलेगी और आने-जाने पर बस में छूट मिलने के साथ ही साथ सरकार द्वारा दिव्यांगों के लिए संचालित तमाम योजनाओं का लाभ भी प्राप्त होगा.
फिर क्या यह सुनकर रामऔतार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. वह दौड़े दौड़े घर के अंदर गए और अपना दिव्यांग प्रमाण पत्र लेकर ब्लॉक कार्यालय पहुंच गए. तब वहां पर जो जानकारी उसे मिली उसके पैरों के तले की जमीन ही खिसक गई. जिसमें पहली बात तो यह है कि राम औतार का यह दिव्यांग प्रमाण पत्र मात्र 30% अपंगता का बना हुआ है. जिससे उसे कोई लाभ प्राप्त नहीं हो सकता है. क्योंकि दिव्यांग व्यक्ति को लाभ प्राप्त करने के लिए 40% अपंगता का प्रमाण पत्र होना चाहिए. जबकि राम औतार को एक आंख से बिल्कुल नहीं दिखाई पड़ता है और दूसरी आंख से भी उसे कम दिखता है लेकिन उसके बावजूद उसकी दिव्यांगता 30% ही दिखाई गई है.
ब्लॉक अधिकारी ने फटकार का भगाया
यही नहीं उससे भी बड़ी बात तो यह निकलकर सामने आई कि 11 अप्रैल 2023 को बने इस प्रमाण पत्र में रामऔतार को बाई आंख से अपंग दिखाया गया है जबकि वह वास्तव में दाहिनी आंख से अपंग है. ऐसे में ब्लॉक के अधिकारी उल्टे राम औतार को डांटना शुरू कर दिया उन्होंने कहा कि यह गलत है तुमने कहीं से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया है प्रमाण पत्र में जो लिखा हुआ है वैसा तुम्हारे साथ नहीं है. क्योंकि उसमें बाई आंख से दिव्यांगता दिखाई गई है और तुम्हारी बाई आंख बिल्कुल सही है जबकि दाई आंख खराब है. तुम्हारे ऊपर 420 का मुकदमा भी हो सकता है और गलत करने के चक्कर में तुम जेल भी जा सकते हो. ऐसे में बेचारा अनपढ़ और गरीब आदमी राम औतार की सारी खुशियां धरी की धरी रह गई वह निराश होकर डरा -सहमा हुआ घर वापस लौट आया.
सीएमओ ने सुधार करवाने का किया दावा
फिलहाल इस मामले में जब जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर अंशुमान सिंह से बात की गई तो उन्होंने संबंधित स्टाफ को बुलवाकर उसकी जांच करते हुए पूरी जानकारी लेकर बताया कि रामऔतार का दिव्यांग प्रमाण पत्र फर्जी नहीं है वह बिल्कुल सही है. यह इसी कार्यालय से ही जारी किया गया है. दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने के समय सर्वर में त्रुटि होने के कारण दाहिनी आंख के बजाय बाई आंख लिख उठा है और कोई गंभीर बात नहीं है.मैं इसे बुलवाकर ठीक करवा दूंगा.
यह भी पढ़ें: लखनऊ हंगामे पर अजय राय की घेराबंदी, पूर्व सांसद राजेश मिश्रा ने उठाए सवाल
